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विशाल मेगा मार्ट को ध्वस्त करने का नोटिस चस्पा

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मेरठ। गढ़ रोड स्थित विशाल मेगा मार्ट पर आवास विकास परिषद ने ध्वस्तीकरण का नोटिस चस्पा कर दिया है। कहा है कि या तो इस निर्माण को 15 दिन के भीतर हटा लें अन्यथा आवास विकास खुद इस पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर देगा। ध्वस्तीकरण पर हुए व्यय की वसूली भी मार्ट स्वामियों से की जाएगी।
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विशाल मेगा मार्ट को लेकर उस समय खुलासा हुआ था, जब एमडीए ने इस पर सील लगा दी थी। कहा गया था कि यहां 741.73 वर्ग मीटर क्षेत्र पर निर्माण हो रहा है, जो पूरी तरह से अवैध है। इसका नक्शा ही स्वीकृत नहीं कराया गया। इस पर एमडीए ने यहां एक्शन लिया। बाद में मार्ट स्वामियों ने एमडीए में दावा पेश किया कि वह शमन शुल्क जमा कर संशोधित नक्शा पास कराने को तैयार हैं। इस बाबत एमडीए ने एडवांस शुल्क के रूप में दस लाख रुपये जमा करा लिया। साथ ही कुल शमन शुल्क का आंकलन शुरू कर दिया। यह आंकलन लगभग 93 लाख रुपये बन रहा है। इस पर सील भी खोल दी गई।
एनओसी मांगी तो खुल गई पोल
इस बाबत एमडीए ने प्रशासन से एनओसी मांगी। यह जानने के लिए जहां यह जमीन है, वहां किसी तरह की कोई सरकारी, परिषद अथवा नजूल भूमि तो नहीं है। इस पर प्रशासन ने जांच कराई तो कुछ और ही मामला निकला। यह जमीन आवास विकास परिषद के नाम निकली। एसडीएम ने डीएम कार्यालय को जो रिपोर्ट भेजी, उसके अनुसार विशाल मेगा मार्ट खसरा नंबर 5863 पर बना है। इसका समस्त क्षेत्रफल 0.898 हेक्टेयर है। यह समस्त खसरा नंबर ही भू अभिलेखों में आवास विकास परिषद लखनऊ के नाम दर्ज है। साथ ही लेखपालों ने रिपोर्ट लगाई कि यह खसरा नंबर आवास विकास के नाम दर्ज है और यहां विशाल मेगा मार्ट में व्यावसायिक गतिविधियां चल रही है। इस पर एमडीए बैक फुट पर आ गया। शमन शुल्क लौटा दिया गया और गेंद आवास विकास के पाले में डाल दी गई कि वही कार्रवाई करे।
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अब कार्रवाई की तैयारी
आवास विकास ने इसकी जांच कर पाया कि वास्तव में यह जमीन आवास विकास की अर्जित भूमि है। ऐसे में आवास विकास के अधिशासी अभियंता डीके गुप्ता ने अब मार्ट पर नोटिस जारी किया है। शास्त्रीनगर निवासी हरीश चांदना एवं उनकी पत्नी दीपा चांदना, नीरज कुमार दुरेजा और उनकी पत्नी दिव्या दुरेजा, जुगल किशोर दुरेजा एवं उनकी पत्नी नीना दुरेजा, सुनील कुमार एवं उनके पुत्र अंकित के नाम जारी इस नोटिस में कहा गया है कि यदि 15 दिनों के भीतर उन्होंने खुद निर्माण नहीं हटाया तो आवास विकास खुद सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा। इन सभी ने इस बाबत हाईकोर्ट में भी अपील की थी, जिसका निस्तारण हाईकोर्ट ने 12 जून 2017 को ही कर दिया था। प्रत्यावेदन का निस्तारण भी आवास विकास ने कर 22 जुलाई को पत्र जारी कर सूचित किया था कि वे मार्ट से अपना निर्माण खुद ही हटा लें। ऐसा नहीं करने पर यह नोटिस जारी किया जा रहा है। हालांकि करीब पांच माह तक आवास विकास इसका इंतजार करता रहा। लेकिन अब नोटिस चस्पा होने के कारण माना जा रहा कि इस बार मार्ट एक्शन होगा।
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खास बातें
- आवास विकास ने दिया 15 दिन का अल्टीमेटम
- आवास विकास की जमीन पर खड़ा है विशाल मेगा मार्ट
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