मेरठ। मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी ने कहा कि सूचना का अधिकार जनता का मौलिक अधिकार है। ऐसे में बिना तर्क संगत कारणों के सूचना न देना या जानबूझकर भ्रामक या अपूर्ण सूचना देना पूरी तरह गलत है। यदि कोई जनसूचना अधिकारी ऐसा करता है तो उसे दंडित किया जायेगा।
बचत भवन में सोमवार को आयोजित एक दिवसीय आरटीआई प्रशिक्षण शिविर में मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी दीप प्रज्ज्वलित करते हुए शिविर का शुभारंभ किया। उन्होंने जनसूचना अधिकारियों से कहा कि जनसूचना का अधिकार एक क्रांतिकारी अधिनियम है, लोक प्राधिकरण में पारदर्शिता व जवाबदेही बढ़ाने व सुशासन के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम लाया गया है। जनसूचना अधिकारियों का प्रथम व प्रमुख दायित्व सूचना देना है, सूचना न देने के तरीके ढूंढना नहीं। उन्होंने कहा कि मंडल के सभी जिलों में अलग-अलग 18 से 23 सितंबर तक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा। बताया कि आयोग द्वारा सरकार से सुझाव सहित अनुरोध किया गया है कि अगर किसी सूचना को मांगने के लिये किसी अधिनियम में पूर्व में ही तरीका व फ ीस निर्धारित की गयी है, तो ऐसी सूचना को सूचना के अधिकार अधिनियम में न मांगकर संबंधित विभाग से अधिनियम में वर्णित नियमों के अंतर्गत मांगी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस पर निर्णय जल्द होने की उम्मीद है।
मेरठ जनपद की 800 अपील लंबित
राज्य सूचना आयुक्त राजकेश्वर सिंह ने बताया कि आयोग में मेरठ मंडल की 3000 अपीलें लंबित है, जिसमें से मेरठ जनपद की 800 अपील है। उन्होंने कहा कि वह नवंबर माह में मेरठ आकर इन अपीलों की सुनवाई करेंगे। राजकेश्वर सिंह ने निर्देश दिया कि जनसूचना अधिकारी अपने उत्तर में प्रथम अपीलीय अधिकारी का नाम व पद नाम अवश्य लिखें। इसके अलावा यह भी दर्ज करें कि यदि आवेदक प्राप्त सूचना से संतुष्ट नहीं है तो वह प्रथम अपीलीय अधिकारी को अपील कर सकता है।
राजकेश्वर सिंह ने बताया कि 200 वर्ग मीटर व उससे अधिक के भवन जिसका नक्शा संबंधित प्राधिकरण द्वारा पास किया जाता है। उसकी जानकारी उस प्राधिकरण से ली जा सकती है। प्राईवेट कंपनी की जानकारी भी उस लोक प्राधिकरण से ली जा सकती है, जिसके नियंत्रण में वह प्राईवेट कंपनी आती है। इसके साथ ही मांगे जाने वाली सूचना के अंतर्गत कोई जानकारी, किसी निर्माण कार्य या किसी अन्य सामग्री का प्रमाणित नमूना लिया जा सकता है। राजकेश्वर सिंह ने कहा कि आवेदक को 30 दिन में सूचना देना जनसूचना अधिकारी का दायित्व है। थर्ड पार्टी से संबंधित सूचना के संबंध में निर्णय या सूचना 40 दिन के अंदर तथा मानवाधिकार से संबंधित सूचना का निस्तारण 45 दिन के अंदर करना होता है।
डीएम समीर वर्मा, स्टेट रिसोर्स पर्सन व ट्रेनर राजेश मेहतानी ने अधिकारियों को अधिनियम व नियमावली की धाराओं व उपधाराओं के बारे मे विस्तार से बताया। इस अवसर पर सचिव सूचना आयोग, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजिल सैनी, अपर आयुक्त आरएन धामा, अपर जिलाधिकारी वित्त आनंद शुक्ला, प्रशासन सत्य प्रकाश पटेल, नगर मजिस्ट्रेट एमपी सिंंह, सीएमओ डॉ. राज कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्य सूचना आयुक्त ने किया एक दिवसीय आरटीआई प्रशिक्षण को संबोधित
जावेद उस्मानी ने कहा अपूर्ण व भ्रामक सूचना देने वाले अधिकारी हाेंगे दंडित
आयोग में मेरठ की 800 और मंडल की 3000 अपील लंबित