उन्होंने समारोह में शामिल हुए छात्र-छात्राओं, अभिभावकों, शिक्षक शिक्षिकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जब मैं 1 साल का था, मेरे पिताजी का देहांत हो गया था। गांव से गिरते पड़ते यूनिवर्सिटी तक का सफ़र तय किया।
कॉलेज से विश्वविद्यालय का सफर तय करने के बाद मैं यहां से आदमी बनकर निकला और अपने जीवन को नया आयाम देने के लिए आगे का सफर शुरू किया। यह सफर आदमी को क्या-क्या बना देता है, यह मैंने अपने जीवन में देखा और बहुत लोगों के जीवन में वापस आकर जो बुढ़ापे की अनुभूति है।
पढ़ाई पूरी करने के बाद जब मैं अपने गांव जा रहा था तो मैंने सोचा यहां कुछ भी नहीं बदला आज भी लोग आपस में लड़ते हैं वह पराक्रम वाले लोग ही नहीं रहे, जो नौजवानों में जोश भरा करते थे। हां इस बात की खुशी जरूर है कि धारा 370 हटने के बाद गांव के नौजवानों में जोश पैदा किया।
एजुकेशन से ज्यादा इंसान को कोई चीज एंपावर नहीं करती। ना तो दहेज में चार छल्ले वाली गाड़ी एंपावर करती है ना बंगला एंपावर करता है ना आपका बिजनेस एंपावर करता है। रुपया एंपावर करता है, एजुकेशन जो आपको बना सकती है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा ही आपको बहुत आगे तक ले जा सकती है, तो इसको आप ही समझ लें, कि यह जो मौका है आपके पास इसमें आप जो बेहतर से बेहतर है वह करिए। बिहार और अन्य विश्वविद्यालय का तर्क देते हुए कहा कि वैसे मुझे थोड़ा अफसोस है कि 11 गोल्ड मेडल में एक गोल्ड सिर्फ एक लड़के का एक ही था, यहां भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला।
लड़कियों के 58 गोल्ड मेडल हैं और लड़कों के 34, लड़कियों को तो बधाई भी देता हूं और यह कहना चाहता हूं कि और आगे बढ़ो हम तो आपको पैदा भी नहीं होने देना चाहते थे। उत्तर भारत के लोग तो कोशिश करते हैं कि आप पैदा ही न हों, लेकिन जब पैदा हो जाती हैं तो मैदान में आप से आगे निकल जाती हैं।
देश के किसी भी विद्यालय में लड़के लड़कियों के बराबर नहीं। काबिल बनो पढ़ो और आगे बढो। मैं शोभित का आभारी हूं, जिन्होंने व्यापार में न जाकर इस तरफ चले आए। ब्रिटेन में जो वर्ल्ड वार द्वितीय हुआ था, उसमें जो बजट पेश किया जा गया था तो प्रधानमंत्री ने इस सभी मद संबंध में कटौती की, लेकिन शिक्षा के मध्य में एक पैसे की भी कटौती नहीं की सारे विपक्ष ने हल्ला मचा के आपने शिक्षा में कटौती क्यों नहीं की। तो उसने कहा कि इसलिए नहीं की है मकान दोबारा बन जायेंगे, पुल दोबारा बन जाएंगे, लेकिन अगर एक पीढ़ी शिक्षा की खराब हो गई तो वह दुबारा नहीं आएगी।
विदेशों में बड़े उद्योगपति ज्यादातर शिक्षण संस्थाओं को देखते हैं। इस वजह से वह जाने जाते हैं। और हमारे यहां 300 करोड़ की सगाई एक मुंबई के उद्योगपति नेकी थी, 300 करोड़ तो चेक से हुई थी और कम से कम वह सगाई 1000 करोड़ की हुई थी अगर वह पैसा शिक्षा में खर्च हो तो और सुधार हो सकता है आप अमेरिका में जा कर देखिए, जो बच्चे कामयाब होते हैं वह वापस आते हैं और वापस आकर अपनी यूनिवर्सिटी को अपनी आमदनी का हिस्सा देते हैं। उसके बढ़ाने में हिस्सेदारी करते हैं ।
आपसे भी कहूंगा कि कामयाब होते हैं वापस जरूर आना और इसके आगे बढ़ाने में अपना योगदान करना। हम अपने कैरियर में आगे बढ़ते हैं और उसके बाद हमारी ड्यूटी होती है कि हम समाज में अच्छे से काम करें, लेकिन जब आप निकलते हैं उस वक्त आफ आइडियलिज्म से भरे हुए होते हैं। मैं जनता की सेवा करूंगा, लेकिन यह समाज आपको इस लायक छोड़ता नहीं। जिस तरह के सब्जेक्ट में डिग्री पाने के लिए हमारे इलाके के लोग अपने बच्चे को भेजने के लिए जमीन आसानी से ऊपर सारी पढ़ाई लोगों को उपलब्ध कराई है। दीक्षांत समारोह में सो विश्वविद्यालय की ओर से राज्यपाल को मानद उपाधि भी दी गई।