2008 में रशीद खां की विधवा पत्नी वसीला व 11 बच्चों ने जिला अधिकारी व सेल टैक्स अधिकारी को प्रतिवादी बनाकर सिविल कोर्ट देवबंद में वाद दायर कर दिया था। इस केस की सुनवाई एसीजेएम की अदालत में चल रही थी। सोमवार को एसीजेएम परविंदर सिंह की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कब्जा न दिलाने का कारण जिला प्रशासन की खामी माना।
एसीजेएम ने डीएम व सेल टैक्स अधिकारी को आगामी एक माह में वसीला खां व उनके बच्चों को 90 हजार की राशि व उस पर 10 प्रतिशत वार्षिक की दर से 36 वर्षों का ब्याज अदा करने का आदेश दिया है।
एक माह में धनराशि का भुगतान न होने पर 6 प्रतिशत वार्षिक की दर से रकम पर ब्याज अदा करना पड़ेगा। वहीं अदालत के फैसले पर न्याय के लिए भटक रही वसीला खां व उनके बच्चों ने राहत की सांस ली है।