मवाना सड़क के बहचौला गांव में एक बड़ी घटना सामने आई है। हाईटेंशन लाइन का तार टूटने से कई किसानों की गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। इस घटना में करीब बत्तीस बीघा फसल का नुकसान हुआ है। विद्युत विभाग की लापरवाही से नाराज किसानों ने अम्हैड़ा बिजलीघर पर धरना दिया।
धरना देने वालों में दिनेश चौहान, विक्की शर्मा, सुभाष चंद, सोनू चौहान, चिंता देवी और शोभाराम आदि मौजूद रहे।
यह घटना बहचौला गांव के जंगल में शनिवार दोपहर खेत के ऊपर से जा रही हाईटेंशन लाइन के तार हवा से टकराकर टूट गए। तारों के टूटने से निकली चिंगारी ने खेतों में आग लगा दी। आग तेजी से फैली और किसानों की खड़ी फसल को अपनी चपेट में ले लिया। सूचना पुलिस और फायर ब्रिगेड को दी गई। गांव के लोगों ने किसी तरह आग बुझाई, परंतु तब तक फसल जल चुकी थी। आग से शोभा शर्मा, सुभाष शर्मा, महा सिंह और चिंता देवी चार किसानों को भारी नुकसान हुआ। उनकी करीब 32 बीघा गेहूं की फसल पूरी तरह जल गई। विद्युत विभाग की इस लापरवाही से किसान बेहद आक्रोशित थे।
किसानों का विरोध प्रदर्शन
विद्युत विभाग की लापरवाही से किसान नाराज हो गए। नुकसान से गुस्साए किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर अम्हैड़ा बिजलीघर पहुंच गए। उन्होंने वहां पहुंचकर विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वरिष्ठ भाजपा नेता चौधरी अजीत सिंह के नेतृत्व में क किसानों ने बिजलीघर पर धरना शुरू कर दिया। उनकी मुख्य मांग जर्जर विद्युत लाइन को तुरंत बदलने की थी। इसके साथ ही, किसानों ने आग से हुए नुकसान के लिए उचित मुआवजे की भी मांग की। धरना देने वालों में दिनेश चौहान, विक्की शर्मा, सुभाष चंद, सोनू चौहान और शोभाराम शामिल थे।
उपखंड अधिकारी का हस्तक्षेप
किसानों के धरने की सूचना मिलते ही गंगानगर उपखंड अधिकारी अरविंद कुमार कुशवाहा मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों से बात की और उन्हें समझाने का प्रयास किया। किसानों की समस्या को चौधरी अजीत सिंह ने मौके पर पहुंचे गंगानगर उपखंड अधिकारी अरविंद कुमार कुशवाहा के सामने रखी। एसडीओ ने मौके पर चलकर स्थिति देखने और आग से हुई आर्थिक मदद कराने में मदद करने की बात कही। इसके बाद किसानों ने धरना खत्म किया। किसान एसडीओ को मौके पर लेकर गए। उपखंड अधिकारी ने किसानों को आश्वासन दिया कि आर्थिक नुकसान में हर संभव मदद की जाएगी। जर्जर लाइनों पर चिंता
किसानों ने अपनी बातचीत में जर्जर विद्युत लाइनों की समस्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि ऐसी पुरानी और खराब लाइनें अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। उन्होंने मांग की कि विद्युत विभाग को इन जर्जर लाइनों को प्राथमिकता के आधार पर बदलना चाहिए। किसानों ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की। इस घटना ने क्षेत्र में विद्युत सुरक्षा के मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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