रहस्यमयी बुखार ने जकड़ा शहर, वजह रही अनजान
12 माह की रिपोर्ट में किया स्वास्थ्य विभाग ने खुलासा
70983 मरीज रखे गए फीवर ऑफ अनॉन ऑरिजिन (बुखार के अज्ञात कारण) की श्रेणी में
101 डिग्री बुखार रहा दो से तीन सप्ताह तक, जांच में वजह नहीं चली पता
अरीश रिज़वी
मेरठ। अक्सर हम सुनते हैं कि आजकल पता नहीं कौन-कौन सी नई बीमारी हो रही हैं, जिनके कारणों के बारे में डॉक्टरों को भी नहीं पता। मेडिकल साइंस की मानें तो जिले में पिछले 12 माह में 70983 मरीज ऐसे मिले हैं, जिन्हें दो से तीन सप्ताह तक 101 डिग्री फॉरेन्हाइट से ज्यादा बुखार रहा। चिकित्सकों ने इनकी लैब में जांच कराई। लेकिन कोई भी बीमारी प्रकाश में नहीं आई। यानी यह पता नहीं चल पाया कि इन लोगों को बुखार आखिर किस वजह से हुआ। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने शासन को रिपोर्ट भेजी है।
इस रहस्यमयी बुखार को स्वास्थ्य विभाग ने फीवर ऑफ अनॉन ओरिजिन (अज्ञात कारणों से हुआ बुखार) की श्रेणी में रखा है। अमूमन अगर बुखार होता है तो उसका कारण स्वाइन फ्लू, डेंगू, चिकनगुनिया, टायफाइड और निमोनिया आदि माना जाता है। इनकी जांच कराई जाती है और जांच में ज्यादातर में इनमें से कोई न कोई कारण निकल ही आता है। लेकिन पिछले 12 माह में रहस्यमयी बुखार से महानगर जकड़ा रहा। चिकित्सक भी हैरान रहे। हालांकि गनीमत यह रही कि इनमें से अधिकांश मरीज ठीक हो गए। मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल हो या फिर निजी अस्पताल और क्लीनिक, सभी में बुखार के मरीजों की भरमार रही।
2-3 सप्ताह तक नहीं उतरा
रिपोर्ट में बताया गया कि एंटीबायोटिक दवाई खाने के बाद तीन से पांच दिन में उतर जाने वाला बुखार बहुत से मरीजों का दो से तीन सप्ताह तक नहीं उतरा। बुखार उतरने के बाद भी चिकनगुनिया की तरह हाथों-पैरों में दर्द, बदन दर्द और चिड़चिड़ापन रहा। डेंगू के मरीजों की तरह बुखार, जोड़ों में दर्द, चक्कर आना, थकान, भूख में कमी और उल्टियां आती रहीं। जीका वायरस की तरह आंखें लाल भी हो रही थीं। शुगर और हृदय रोगियों के लिए यह ज्यादा परेशानी देने वाला रहा।
बच्चों पर किया ज्यादा वार
रहस्यमयी बुखार ने बच्चों पर भी खासा वार किया। रिपोर्ट में माना गया कि बच्चों का इम्यून सिस्टम ज्यादा कमजोर होता है और वे खुले में ज्यादा रहते हैं इसलिए वह जल्दी चपेट में आ जाते हैं। बहुत छोटे बच्चे खुलकर बीमारी के बारे में बता भी नहीं पाते हैं।
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हर बीमारी की गंभीरता से स्टडी
स्वास्थ्य विभाग हर बीमारी की गंभीरता से स्टडी कर रहा है। इसकी सूचना शासन के पोर्टल पर भी भेजा रहा है, ताकि हर बीमारी की पूरी निगरानी हो सके और मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके। - डॉ. राजकुमार, सीएमओ
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हजारों वायरस, सबकी जांच जरूरी
वायरस हजारों तरह के होते हैं। डेंगू, चिकनगुनिया या जीका आदि तो पता चल गए हैं। मगर ऐसे भी वायरस हैं, जिनका अभी पता नहीं चल सका है। लैबों में और भी वायरसों की जांच होनी चाहिए, ताकि सभी बीमारी के कारणों का पता चल सके। -डॉ. तनुराज सिरोही, वरिष्ठ फिजिशियन
हो सकता बुखार का नया वायरस
वायरल बुखार के नए वायरस हो सकते हैं, जिसका स्ट्रेन डेंगू और चिकनगुनिया से मिलता जुलता हो सकता है। जिन मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता ठीक है, वे जल्दी इस तरह के बुखार पर काबू पा लेते हैं, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है या वे किसी अन्य बीमारी से भी पीड़ित हैं, उन्हें काफी परेशानी होती है। -डॉ. विश्वजीत बैंबी, वरिष्ठ फिजिशियन