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ऐतिहासिक धरोहर बनेगा थानाभवन का बूढ़ा बाबू तालाब

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ऐतिहासिक धरोहर बनेगा थानाभवन का बूढ़ा बाबू तालाब
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अमर उजाला ब्यूरो
थानाभवन। ऐतिहासिक मान्यता व हिंदू धर्म के लोगों की आस्था का प्रतीक बूढ़ा बाबू तालाब का अस्तित्व करीब 30 साल से खतरे में पड़ा रहा। एक समय था जब बच्चों को एलर्जी की बीमारी से दूर रखने के लिए इस तालाब की मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन रख-रखाव के अभाव व गंदगी भरने के कारण तालाब विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गया। गन्ना विकास राज्य मंत्री सुरेश राणा ने इस तालाब के कायाकल्प का प्रयास किया है।
कस्बा थानाभवन के बुजुर्ग बताते हैं कि मुगलकाल के बादशाह हुमायुं के समय बूढ़ा बाबू तालाब की स्थापना की गई। चूंकि, बू़ढा बाबू को भगवान शंकर का स्वरूप माना जाता है इसलिए ही इस तालाब का नाम भी बू़ढा बाबू रखा गया। करीब सात बीघा भूमि के इस चोकोर तालाब में स्नान करने के लिए सीढ़ियां बनाई गई थीं। खास बात है कि तालाब में सिर्फ बरसात का पानी ही जमा होता था, जो कभी सूखता नहीं था और दूषित भी नहीं होता था। पानी इतना साफ रहता था कि तालाब के नीचे प़डी वस्तुएं भी नजर आती थीं। मान्यता की बात करें तो प्रत्येक वर्ष चैत्र मास के पहले नवरात्र के दिन तालाब पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता था। इस दौरान हजारों महिला, पुरुष व बच्चे यहां पूजा करने के लिए आते थे। वजह थी कि चैत्र मास के दौरान बच्चों में एलर्जी की बीमारी फैल जाती थी। इसलिए महिलाएं पहले नवरात्र के दिन यहां भगवान शंकर यानी बूढ़ा बाबू की पूजा कर बच्चों के निरोग रहने की कामना करती थीं और तालाब से मिट्टी लेकर अपने घर ले जाती थीं। इस मिट्टी का लेप बच्चों को किया जाता था, जिससे बीमारी दूर भाग जाती थी।
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1857 में हो गया था खुर्दबुर्द
1857 तक विधि विधान से यहां पूजा की जाती थी और तालाब का रख-रखाव किया गया। अंग्रेजों ने गौसगढ गांव से कस्बा थानाभवन की तरफ तोपों से प्रहार किया। उस समय तोप संचालक भी थानाभवन निवासी था, इसलिए उसने तोप का मुंह कस्बे से लगे जंगल की ओर घुमा दिया था। तोप के गोले की जद में आने से यह तालाब भी खुर्द बुर्द हो गया था। कई सालों तक कस्बेवासियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, लेकिन उसी समय नगर में चूहों के कारण होने वाली प्लेग बीमारी महामारी की तरह फैल गई। एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार होता नहीऱ्ं था कि दूसरे की मृत्यु हो जाती थी। इस महामारी केस प्रकोप से बचने के लिए दोबारा से बूढा बाबू तालाब को पुनर्जीवित किया और इसकी मिट्टी का लेप लगाने से महामारी से पीछा छूटा।
30 साल के भीतर हुई दुर्दशा
30 साल पहले तक तालाब पर मेले व पूजा अर्चना की गई। लेकिन, नगर पंचायत ने 15 साल पहले तालाब में नाले का पानी छोड़ दिया, जिससे तालाब का पानी दूषित हो गया। यही नहीं, तालाब के एक हिस्से को बीएसएनएल को सौंप दिया। ऐसे में धीरे-धीरे लोगों ने दूषित हो चुके तालाब पर जाना बंद कर दिया और इस तालाब का अस्तित्व भी खतरे में पड़ा गया था।
अब फिर से जगी उम्मीद
थानाभवन से विधायक एवं प्रदेश के गन्ना विकास राज्य मंत्री सुरेश राणा ने इस तालाब को पुनर्जीवित करने का बीडा उठाया, जिसके लिए उन्होंने 76 लाख रुपये के बजट की स्वीकृति भी दिलाई। उसमें से पहली किश्त के रूप में 36 लाख रुपये नगर पंचायत थानाभवन को मिल चुके हैं, जिसके बाद तालाब के कायाकल्प का कार्य शुरु हो गया है। तालाब के साथ खूबसूरत पार्क भी तैयार किया जाएगा। इससे धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों की उम्मीदे फिर से जागृत हो गई हैं।
- बूढ़ा बाबू तालाब को लोग भगवान शंकर का स्वरूप मानकर पूजते थे। लेकिन, जिम्मेदार लोगों ने तालाब का रखरखाव नहीं किया, जिस कारण आज तालाब महज गंदगी का ढेर बनकर रह गया है। -- सुभाष चंद सिंघल
- गन्ना विकास राज्य मंत्री ने बूढ़ाबाबू तालाब के पुनर्जीवन का बीडा उठाकर धार्मिक आस्था को जिंदा रखा है। मुगलकाल से लोग यहां अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करने के लिए आते हैं। -- नरेंद्र सैनी
- तालाब की खास बात थी कि इसका पानी कभी दूषित नहीं होता था। लोगों की इसके प्रति अटूट श्रद्धा थी, लेकिन जैसे-जैसे तालाब का पानी दूषित होता गया, यहां आने वाले लोगों की संख्या भी घटती गई। -- ब्रहमपाल गर्ग
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- तालाब के खुर्दबुर्द होने से लोगों की आस टूटने लगी थी। लेकिन, जब से लोगों को पता चला है कि तालाब को पुनर्जीवित किया जा रहा है तो फिर से उम्मीद जगी है। -- हरीश सिंघल

महत्वपूर्ण
- बूढ़ाबाबू तालाब मुगलकाल से अपने अंदर समेटे है ऐतिहासिक महत्ता
- बच्चों को एलर्जी से बचाने के लिए तालाब की मिट्टी का लेप किया जाता था
- गन्ना विकास राज्य मंत्री के प्रयास से हो रहा है कायाकल्प
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