दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे की ऊंचाई होगी कम
मेरठ।
दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे की ऊंचाई कम होगी। इसकी ऊंचाई सात से आठ मीटर करने में जहां मिट्टी ज्यादा लगेगी तो वहीं समय भी अधिक लगेगा। ऐसे में एनएचएआई इसकी ऊंचाई आधी करने पर विचार कर रही है। अहम यह भी है कि इसमें 30 फ्लाई ऐश (राख) का प्रयोग होगा।
दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे पर मेरठ में तेजी से काम शुरू हुआ है। हालांकि कुछ खसरा नंबर मौके पर न होने के कारण पेच फंसा है, पर जहां जगह है वहां युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। दरअसल इस एक्सप्रेस का यह अंतिम चरण है जिसको लेकर सरकार अब बेहद गंभीर है। कहा गया है कि इस ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे का निर्माण मार्च 2019 तक पूरा करो।
ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस का दिया उदाहरण
यह एक्सप्रेस वे छह लेन होगा। सबसे अहम है इसकी ऊंचाई। प्लान में इसकी औसत ऊंचाई सात से आठ मीटर तय की गई है। अब इसे कम करने की तैयारी शुरू हो गई है। उदाहरण बताया गया है ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस को जो औसत साढ़े तीन से चार मीटर ऊंचा है। जब वहां ट्रैफिक आसानी से रन कर रहा है तो इसे इतना ऊंचा करने की क्या आवश्यकता है। ऐसे में इसकी ऊंचाई तीन से चार मीटर ही करने का प्लान बन रहा है।
मिट्टी का इंतजाम करना नहीं आसान
इस पर मिट्टी काफी अधिक चाहिए। इसे आठ मीटर ऊंचा करने के लिए मिट्टी लाना आसान नहीं। यह एक बड़ा कारण है जिससे इसकी ऊंचाई कम करने की बात कही जा रही है। विशेषज्ञ बताते हैं इस एक्सप्रेस वे के लिए तीस प्रतिशत एनटीपीसी की फ्लाई ऐश इस्तेमाल की जाएगी। चूंकि ऐसे स्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए स्थानीय मिट्टी बेहद जरूरी है तो लगभग 35 प्रतिशत मिट्टी स्थानीय होगी। इसके अलावा बाकी 35 प्रतिशत मिट्टी बागपत और अन्य स्थानों से लाई जाएगी।
गायब जमीन पर होगा मंथन
इस मार्ग पर परतापुर, कांशी और अच्छरौंडा में 12 खसरा नंबर ऐसे मिले हैं जो इस एलाइनमेंट में बाहर हैं। इनका अधिग्रहण हो चुका है, लेकिन वह मौकेपर नहीं हैं। इसके विपरीत इतने ही नंबर ऐसे हैं जो एलाइनमेंट में बीच में आ रहे हैं पर उनका अधिग्रहण नहीं हुआ है। ऐसे में यहां का काम भले ही रुक गया है पर भराव, समतलीकरण आदि का काम जोर शोर से चालू किया गया है। जमीन के मामले निपटाने की भी उच्चस्तरीय कवायद शुरू हो गई है। इस मसले को निपटाने केलिए प्रोजेक्ट डायरेक्टर किशोर कान्याल के साथ चीफ जनरल मैनेजर डॉ. बीएस सिंघला दौरा करेंगे। न केवल इसकी प्रगति रिपोर्ट देखी जाएगी बल्कि जमीन कैसे मिले इस पर भी बात होगी। खास तौर पर परतापुर में प्रस्तावित गोल चक्कर का नए सिरे से डिजायन बनाने पर बात होगी। चूंकि यहां जमीन कम पड़ रही है। यहां भी खसरा नंबर अधिग्रहण से छूट गए। इसके अलावा इस इंटरचेंज को ज्यादा से ज्यादा बेहतर बनाने की तैयारी है।
वर्जन
भले ही कुछ खसरा नंबर मिसिंग हैं पर इस मामले को निपटा लिया जाएगा। निर्धारित समय में ही हम इस प्रोजेक्ट को पूरा करेंगे। तेजी से इस पर काम हो रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों से भी बात की जा रही है। किशोर कान्याल, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
यहां मिट्टी के लिए तीस प्रतिशत फ्लाई ऐश का प्रयोग किया जाएगा। साथ ही ट्रैक और इंटरचेंज के सभी तकनीकी पहलुओं पर हम विचार कर रहे हैं। अरविंद कुमार मैनेजर तकनीक, एनएचएआई