सरकारी जमीन पर सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित
मेरठ।
हापुड़ अड्डा स्थित सरकारी जमीन पर कब्जे के मामले में सिविल जज सीनियर डिविजन कोर्ट में सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया है। इस मामले में कब्जेदार द्वारा वाद दायर किया गया था, जिस पर सरकारी वकील ने जवाब दाखिल करते हुए अपना पक्ष रखा है।
हापुड़ अड्डा स्थित खसरा नंबर 4632 राजस्व अभिलेखों में सरकारी जमीन है। लेकिन बिल्डरों ने इस जमीन के एक हिस्से पर व्यवसायिक कांप्लेक्स खड़ा कर लिया। अमर उजाला में मामला से संबंधित समाचार प्रकाशित होने पर एमडीए की टीम ने पहले सील लगाई और फिर ध्वस्तीकरण कर दिया। इससे पहले अपर जिलाधिकारी वित्त के यहां से कब्जेदारों को नोटिस जारी हुए कि वह अपने मालिकाना हक के साक्ष्य दिखाते हुए जवाब दाखिल करें।
इस पर बिल्डर पक्ष से परवेज पुत्र यूनुस की तरफ से सिविल जज सीनियर डिविजन कोर्ट में वाद दायर किया गया। जिस पर लगातार सुनवाई के बाद बृहस्पतिवार को सरकारी वकील ने अपना पूरा पक्ष रखा। परवेज द्वारा जहां अपने पक्ष में 1924 से अब तक इस जमीन के हुए विक्रय पत्र, नगर निगम से भवन कर की रसीदें आदी जारी होने के प्रमाण दिए गए। वहीं सरकारी वकील की तरफ से 1876 से नजूल की जमीन होने के साथ ही बताया गया कि वादी की तरफ से दिए गए बैनामो में खसरा नंबर दर्ज नहीं है। इस मामले में सुनवाई के बाद न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
खास बातें
हापुड़ अड्डा चौराहा स्थित सरकारी जमीन का मामला
सिविल जज सीनियर डिविजन कोर्ट में हुआ था वाद दायर