फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किसानों की रिट खारिज, एमडीए ने 300 करोड़ की जमीन पर जीती कानूनी जंग

Tue, 22 Nov 2016 06:00 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
गंगानगर एक्सटेंशन को लेकर एमडीए और किसानों के बीच चल रही कानूनी जंग में एमडीए को बड़ी सफलता मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किसानों की रिट खारिज कर दी है। इसमें किसानों ने दावा किया था कि जमीन पर उनका लंबे समय से कब्जा है, लिहाजा नई भू अधिग्रहण नीति के हिसाब से यह जमीन किसानों को ही छोड़ी जाए। एमडीए एक बार फिर से इस जमीन पर विकास करने की तैयारी कर रहा है।
विज्ञापन

गंगानगर एक्सटेंशन में मेरठ विकास प्राधिकरण ने जमीन का अधिग्रहण किया था। तभी से इस जमीन पर विवाद चला आ रहा है। अपर सचिव एमडीए बैजनाथ ने बताया कि यहां की 204 एकड़ जमीन का अवार्ड सात मार्च 1992 को हुआ और इसका 5.51 करोड़ रुपये एमडीए ने बतौर मुआवजा तय किया था। बाद में प्रतिकर के रूप में भी एमडीए ने यहां पैसा दिया तो किसानों ने इसे नहीं लिया। इस पर 2.46 करोड़ रुपये 7 दिसंबर 2007 को एमडीए ने सीजेएम कोर्ट में प्रतिकर का जमा कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट में भी गए थे किसान
इस प्रकरण में किसान सुप्रीम कोर्ट गए थे। जहां एमडीए ने अपना पक्ष पेश किया था। सारे दस्तावेज पेश करते हुए बताया कि एमडीए यहां सारी प्लानिंग कर चुका है। इस पर आठ अप्रैल 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने माना कि भू अधिग्रहण एक्ट 1984 के तहत एमडीए ने सही अधिग्रहण किया है।
विज्ञापन


दो बार कब्जे की नाकाम कोशिश
एमडीए ने सुप्रीम कोर्ट से जीतने के बाद इस जमीन पर दो बार कब्जा लेने की नाकाम कोशिश की थी। एक बार तो बाकायदा इसे लेकर एमडीए कर्मचारियों और किसानों में जमकर संघर्ष हुआ। लाठी डंडों, हेलमेट आदि से लैस होकर एमडीए कर्मी कब्जा लेने गए थे। दोनों तरफ से एक-दूसरे पर मुकदमा दर्ज क राया गया। एमडीए कर्मचारियों अधिकारियों को हाईकोर्ट से मिले अरेस्टिंग स्टे से राहत मिली थी, अन्यथा गिरफ्तारी सुनिश्चित थी।

अब हाईकोर्ट ने दी एमडीए को राहत
इस प्रकरण के बाद अब फिर से किसान हाईकोर्ट गए। अपर सचिव बैजनाथ के मुताबिक सुदर्शन कुमार जैन ने पिछले साल इस बाबत रिट दायर की। कहा कि इस जमीन पर उनका कब्जा है, लिहाजा नई भू अधिग्रहण नीति के हिसाब से यह जमीन उन्हें ही छोड़ दी जाए और एमडीए का आधिपत्य इस जमीन पर नहीं बनता है। हाईकोर्ट ने किसानों की इस रिट पर स्टे भी कर दिया था। अब एमडीए ने इस पर काउंटर दाखिल किया और सुप्रीम कोर्ट में हुए फैसले के भी सभी तथ्य पेश किए। इस पर हाईकोर्ट ने सुदर्शन कुमार जैन की याचिका खारिज कर दी है। एमडीए अब फिर इस जमीन पर कब्जे की तैयारी कर रहा है।

कीमत 300 करोड़ से ज्यादा
वर्तमान में इस जमीन की कीमत तीन सौ करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। यहां 10 से 12 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर से ज्यादा का रेट है। यह जमीन आठ लाख 25 हजार वर्ग मीटर बनती है। एमडीए डेवलप करे तो पचास प्रतिशत जमीन यदि डेवलपमेंट में निकल भी जाए तो भी यहां एमडीए को काफी लाभ हो सकता है।
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें