- दो साल से छतरी मोड़ पर चल रहा धरना, चार गुना मुआवजे समेत 10 मांगों पर अड़े किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा (मेरठ)। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे बसने वाले औद्योगिक गलियारे के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में छतरी मोड़ पर धरना दे रहे तीन गांवों के किसानों ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को मांग पत्र सौंपने शुरू कर दिए हैं। किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष सोपाल सिंह के अनुसार, योजना से जुड़े करीब 290 किसान अपनी मांगों के साथ मांग पत्र भरकर क्षेत्रीय लेखपाल मुकुल को सौंप चुके हैं। किसानों का कहना है कि मांगें पूरी होने के बाद ही वह जमीन देने पर अंतिम सहमति देंगे।
गांव छतरी, खड़खड़ी और गोविंदपुरी के किसानों की करीब 292.79 हेक्टेयर भूमि दूसरे चरण में औद्योगिक गलियारे के लिए चिह्नित की गई है। इससे लगभग 800 किसान प्रभावित होंगे।करीब दो वर्षों से किसान छतरी मोड़ पर धरना दे रहे हैं। शुरुआत में उपजाऊ जमीन देने से इन्कार करने वाले किसानों ने अब उचित मुआवजे और अन्य मांगें पूरी होने पर भूमि देने की सहमति जताई है।
ये हैं किसानों की प्रमुख मांगें
किसानों ने बाजार मूल्य 4880 रुपये प्रति वर्ग मीटर का चार गुना मुआवजा देने, तीनों गांवों में समान दर से भुगतान करने और प्रत्येक किसान को 10 प्रतिशत विकसित भूखंड देने की मांग की है। इसके अलावा भूमिहीन किसानों को 10 लाख रुपये अनुदान, प्रत्येक किसान परिवार के योग्य सदस्य को नौकरी, मुआवजे की राशि को करमुक्त करने और सभी किसानों को आयुष्मान कार्ड की सुविधा देने की मांग की है। किसान चाहते हैं कि औद्योगिक गलियारा गांवों की आबादी से करीब 200 मीटर दूर बनाया जाए। भूमि अधिग्रहण से संबंधित वार्ता धरनास्थल पर ही करने की मांग भी की गई है।
मांग पत्र के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
जिलाधिकारी की ओर से गठित समिति 2 अक्तूबर को एडीएम प्रशासन विजयवर्धन तोमर के नेतृत्व में धरनास्थल पर पहुंची थी। अधिकारियों ने किसानों से सहमति पत्र भरने को कहा था। प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि शासन की सहमति मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जून में भी तत्कालीन एडीएम प्रशासन सत्य प्रकाश सिंह ने अधिकारियों के साथ धरनास्थल पर पहुंचकर किसानों से वार्ता की थी।