एक दो नहीं, 240 मुस्लिम बेटियां ऐसी रहीं, जिनकी डोली की राह का रोड़ा सरकारी अधिकारी बन गए। मंडल में शादी अनुदान के लिए 48 लाख रुपये सरकार को वापस कर दिए गए। उस हाल में जबकि सरकार ने पैसा भी दे रखा था और आवेदक पात्र बेटियां भी थीं। मार्च माह में वापस जाने से इन परिवारों को तगड़ा झटका लगा है।
यह थी शादी अनुदान योजना
पिछली सरकार ने अल्पसंख्यक बेटियों की शादी के लिए शादी अनुदान योजना शुरू की थी, जिसका मुख्य लाभ मुस्लिम बेटियों को मिल रहा था। इस योजना में ऐसे परिवार की बेटियों को लाभ दिया जाता, जिस परिवार की अल्प आय हो। यानी नगर क्षेत्र में 56560 रुपये सालाना और ग्रामीण क्षेत्र में 46090 रुपये से परिवार की आय ज्यादा न हो। इस योजना में शादी के लिए वधू पक्ष को बीस हजार रुपये का अनुदान दिया गया। एक परिवार की अधिकतम दो बेटियों को यह अनुदान देने का नियम है।
48 लाख रुपये वापस भेज दिया
31 मार्च 2017 तक की बात करें तो इस योजना के तहत मंडल के सभी छह जिलों में तीन हजार से ज्यादा बेटियों ने इसके लिए आवेदन किया 1889 को इस लायक पाया गया कि इन पर प्रोसेस आगे बढ़ाया जा सके। दो करोड़ 92 लाख रुपये बीते वर्ष मंडल को इस बाबत बजट जारी हुआ जिसमें से 48 लाख रुपये खर्च नहीं किए जा सके। यानी 240 बेटियों को यह पैसा दिया ही नहीं गया। उस हालत में जबकि सारी प्रक्रिया पूरी थी। यह रकम मार्च के माह में ही शासन को वापस भेज दी गई। इससे इन पात्र लड़कियों को इसका लाभ ही नहीं मिल पाया। मेरठ से 12 लाख रुपये वापस भेजे गए। बुलंदशहर से तीस लाख रुपये लौटाए गए। गौतमबुद्घनगर से 5.80 लाख रुपये वापस किए गए।
और बड़ा हुआ है खेल
बागपत, गाजियाबाद तथा हापुड़ में सीधी रकम न लौटाकर पात्रों की संख्या को लेेकर पहले ही खेल किया गया। यह संख्या कम दर्शा दी गई। पात्र होने के बावजूद यह रकम नहीं दी गई। बागपत में ही 600 से ज्यादा पात्र लड़कियां थी जिन्हें पैसा नहीं मिला और रकम वापस भेजी गई।
अब सरकार मुस्लिम बेटियों की शादी की बात कह रही
योगी सरकार के वक्फ राज्य मंत्री हसीन रजा ने अब कहा है कि मुस्लिम बेटियों की शादी कराई जाएगी। केवल अनुदान नहीं बल्कि शादी में खर्च की पूरी रकम दी जाएगी। इससे माना जा रहा है कि यह योजना भी एक नए रूप में सामने आएगी।