फर्स्ट ईयर और सेकेंड ईयर में ऑनलाइन मिलेगी ओरिजनल मार्कशीट
अच्छे शोध करने वाले छात्र-छात्राओं को 20 लाख, आईएएस-पीसीएस की कोचिंग फ्री
मेरठ। सीसीएसयू ने सत्र 2019-20 के लिए 136 करोड़ रुपये का बजट पास किया है। अच्छे शोध करने वाले छात्र-छात्राओं के प्रोत्साहन को 20 लाख रुपये की राशि मिलेगी। किताबों के प्रकाशन के लिए पांच लाख रुपये दिए जाएंगे। कैंपस में आईएएस, पीसीएस, नेट और जेआरएफ के लिए निशुल्क कोचिंग दी जाएगी। यूनिवर्सिटी ने निर्णय लिया है कि अब ग्रेजुएशन में फर्स्ट और सेेकेंड ईयर एवं पोस्ट ग्रेजुएशन फर्स्ट ईयर में प्रिंट मार्कशीट की बजाय वेबसाइट पर ही ओरिजनल मार्कशीट दी जाएगी। इससे जहां यूनिवर्सिटी का खर्च घटेगा वहीं, छात्रों को भी फायदा होगा। कैंपस में बंद हुए संस्कृत एमफिल कोर्स को फिर से शुरू किया गया है।
शनिवार को यूनिवर्सिटी कैंपस में कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में फाइनेंस कमेटी की बैठक हुई। बैठक में 31 अक्तूबर 2018 को संपन्न हुई। वित्तीय वर्ष 2019-20 का अनुमानित बजट 136.45 करोड़ रुपये का बजट पास किया है। बैठक में तय किया गया कि मेडिकल पाठ्यक्रमों से संबंधित उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन के लिए अब 50 रुपये प्रति उत्तर पुस्तिका पारिश्रमिक दिया जाएगा। पहले यह पारिश्रमिक 15 से 18 रुपये प्रति कॉपी था। कैंपस में 10 लाख रुपये से सेंटर फॉर इंटरनेशनल कॉपरेशन का गठन किया गया है। इससे दूसरी यूनिवर्सिटी से होने वाले एमओयू आदि से छात्र-छात्राओं को मदद मिलेगी।
साहित्यिक सांस्कृतिक परिषद के लिए 12 लाख, चिकित्सालय के लिए 21 लाख, मजदूरी के लिए 15 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। कैंपस में चल रहे मदन मोहन विद्यालय मंदिर के लिए 40 लाख, उपकरणों के रख-रखाव के लिए 70 लाख रुपये का प्रावधान किया गया। प्रशासनिक भवन में होने वाले कार्यक्रम-मीटिंग आदि के हॉस्पिलिटी के खर्चे को कम करते हुए 30 लाख रुपये की जगह 25 लाख रुपये किया गया है।
छात्र-छात्राओं के प्रोत्साहन को बढ़ाया बजट
शोध की गुणवत्ता में वृद्धि एवं प्रोत्साहन देने के लिए शोध प्रोत्साहन राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये किया गया है। शैक्षणिक भ्रमण के लिए 5 लाख एवं प्रकाशन के लिए भी 5 लाख रुपये का प्रावधान किया है। आईएएस, पीसीएस, नेट, जेआरएफ की कोचिंग के लिए 5 लाख रुपये एवं विष विज्ञान की लैब के लिए 30 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। बैठक में खेल मैदान पर सिंथेटिक ट्रैक बनाने का भी निर्णय लिया गया।
मार्कशीट खोने पर ले सकेंगे खुद ही प्रिंट
यूजी में फर्स्ट ईयर और सेकेंड ईयर एवं पीजी में फर्स्ट ईयर की मार्कशीट अब छात्रों को प्रिंट कराकर नहीं दी जाएगी। जो मार्कशीट अब वेबसाइट पर मिलती है, उसकी जगह ओरिजनल मार्र्कशीट को ही अपलोड कर दिया जाएगा। छात्र-छात्राएं जब रिजल्ट पर क्लिक करेंगे तो उन्हें ओरिजनल मार्कशीट मिलेगी। इसका वह कलर या ब्लैक एंड व्हाइट प्रिंट ले सकेंगे। इसी से कॉलेजों में उनको अगली कक्षा में प्रवेश मिल जाएगा। जिनको यह मार्कशीट कहीं दूसरी जगह लगानी है, वह कॉलेज में जाकर इसका वेरीफिकेशन करा सकते हैं। इससे यह भी फायदा होगा कि अगर किसी छात्र की मार्कशीट खो जाती है या फट जाती है तो वह अपने पास सेव करके रखी गई मार्कशीट का प्रिंट ले सकता है। इससे यूनिवर्सिटी हर साल बड़ी मात्रा में खर्च होने वाले कागज की भी बचत करेगी।
संस्कृत में एमफिल फिर से शुरू
कैंपस में संस्कृत में एमफिल पाठ्यक्रम की फिर से शुरुआत की गई है। 2014 में यह कोर्स शिक्षकों की कमी के चलते बंद कर दिया गया था। लंबे समय से छात्र-छात्राएं एमफिल कोर्स फिर से शुरू करने की मांग कर रहे थे।
ये रहे मौजूद
बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने की। बैठक की कार्यवाही वित्त अधिकारी सुशील कुमार गुप्ता ने प्रस्तुत की। बैठक में प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला, डॉ. राजीव गुप्ता, कार्यवाहक कुलसचिव वीपी कौशल, संजीव गोयल, अतुल कुमार, लेखाधिकारी अजय सिंह और प्रेस प्रवक्ता डॉ. प्रशांत कुमार मौजूद रहे।