सरकारी खजाने को ठिकाने लगातीं निगम की योजनाएं
मेरठ। शहर की जनता को आए दिन विकास के सुंदर सपने दिखाए जाते हैं। लेकिन विकास से हटकर इन सपनों का मकसद सरकारी खजाने को ठिकाने लगाने जैसा ही है। कारण है कि हर योजना बनने पर कहीं न कहीं धन खर्च भी होता है। लेकिन धरातल पर जनता को सुविधाएं दिखाई नहीं देती हैं। यही हाल है नगर निगम की चार प्रमुख योजनाओं का, जो सिस्टम की पोल खोलने के लिए काफी हैं।
01: नो वेंडिंग जोन
नगर निगम ने शहर के सभी चौराहों को नो वेंडिंग जोन बनाने का कार्य किया था। मकसद था कि चौराहों पर नो वेंडिंग जोन की परिधि में न तो कोई वाहन खड़ा होगा और न ही ठेला रिक्शा। इस योजना को अमली जामा पहनाने में नगर निगम खजाने से कई लाख रुपये खर्च हुए। सभी चौराहों पर नो वेंडिंग जोन के संकेत के लिए बोर्ड लगाए गए थे। वहीं, चौराहे की सड़कों पर सफेद रंग से पट्टी की गयी थी। नियमों का उल्लंघन करने पर जहां नगर निगम प्रशासन को कार्यवाही का अधिकार था। वहीं, ट्रैफिक पुलिस को व्यवस्था लागू करानी थी। शहर के बच्चा पार्क, तेजगढ़ी, रेलवे रोड, घंटाघर, हापुड़ अड्ड़ा सहित अधिकतर चौराहों को शामिल किया गया था। सभी चौराहों पर नो वेंडिंग जोन में अतिक्रमण देखा जा सकता है।
02: मंगतपुरम
दिल्ली रोड स्थित मंगतपुरम में कूड़े की पहाड़ी का निस्तारण बायोमाइनिंग विधि से कराने की योजना थी। इसके लिए निगम प्रशासन ने दिल्ली सहित कई शहरों में बायोमाइनिंग विधि से कूड़े के निस्तारण को देखा भी। जिस पर निगम के खजाने से ही धन खर्च हुआ। सपना दिखाया गया था कि शीघ्र ही कूड़े की पहाड़ी खत्म हो जाएगी। यह शपथ पत्र नगर निगम प्रशासन ने न्यायालय में भी दाखिल किया था। लेकिन अब मौके के हालात बता सकते हैं कि नगर निगम प्रशासन ने कितना कार्य किया।
03: गांवड़ी प्लांट
- गांवड़ी में कूड़ा निस्तारण प्लांट लगवाने के लिए कई बार डीपीआर बनी। लेकिन तीन साल में अभी तक भी कूड़ा निस्तारण प्लांट धरातल पर नहीं उतर पाया। जबकि साल 2017 के पहले दिन भूमि पूजन पर भी नगर निगम ने खजाना खर्च किया। हर बार जनता को प्लांट के सब्जबाग दिखाए जाते हैं। लेकिन धरातल पर कुछ नहीं है। अब पूर्व की एक कंपनी ने नगर निगम को हाईकोर्ट में घेर लिया है। वहीं, सरकार ने दूसरी कंपनी को कूड़ा निस्तारण प्लांट की स्वीकृति दे दी है। लेकिन वह कंपनी भी अभी तैयार नहीं है।
शीघ्र ही दिखाई देगा काम
जिन चौराहों को नो वेंडिंग जोन घोषित किया गया था, उनको योजना के अनुसार अतिक्रमण मुक्त रखने की जिम्मेदारी ट्रैफिक पुलिस की थी। रही बात कूड़ा निस्तारण की तो उसके लिए कंपनियों का चयन किया जा चुका है। शीघ्र ही धरातल पर कार्य दिखाई देगा। -मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त
खास बातें:
03 प्रमुख योजनाएं कागजों में ही सिमटीं
- धन खर्च के लिए बनी योजनाओं का धरातल पर नहीं कोई असर
- शहर की जनता को दिखाए जाते हैं सुंदर सपने, बदलते नहीं हकीकत में