पुराली के धुंए की चपेट मे आये एनसीआर को प्रदूषित हवा से छुटकारा मिला है, लेकिन क्षेत्र के गांवों मे गन्ना काटने के बाद गन्ने की पत्ती को जलाया जा रहा है। जिससे हवा मे धुआं बढ़ रहा है। पर्यावरणविदों की माने तो कच्चा गन्ना व पत्तियां जलाने से हाइड्रो कार्बन का खतरा बढ़ गया है।
चीनी मिलों मे पेराई शुरू होने के साथ ही गन्ने की कटाई भी तेज कर दी गयी थी। किसान बडे़ पैमाने पर गन्ने की पत्ती एवं खराब हो चुके गन्ने को जला रहे हैं जिससे खेत में दूसरी फसल की बुवाई कर सके। इसकी रोकथाम के लिए ना तो प्रदुषण विभाग कोई कार्यवाही कर रहा है और ना ही अन्य एजेंसी। ब्लॉक माछरा पर तैनात एडीओ पीपी दुष्यंत कुमार ने बताया कि शुगर ट्रेश या पत्ती को जलाना प्रदूषण के लिहाज से खतरनाक है। इससे खेत की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि गन्ने की पत्ती को खेत मे बिछाकर उसके ऊपर 50 किलो प्रति हेक्टेयर यूरिया का मिश्रण मिलाकर पानी लगाकर जुताई कर दे। इससे पत्तियां उर्वरक का काम करेंगी, जो गलकर खाद बन जायेगी।