पंद्रह वर्ष से कर रहा हथियारों का धंधा
सैदुल्लाह ने बताया कि उसका परिवार मुंगेर में रहता है। कम उम्र में ही उसने हथियार बनाने का काम शुरू कर दिया था। उसके गांव में ज्यादातर लोगों का यही धंधा था। सैदुल्लाह कई सालों से फुरकान को हथियार बेच रहा था। पिस्टल को तैयार करने के लिए फुरकान ने उन्हें सभी मशीनें मुहैया करवा दी थी। फिलहाल फुरकान फरार है।
सैदुल्लाह ने बताया कि नसीम उसका साथी है, वह हथियार तस्करी करने में उसकी मदद करता है। वहीं तीनों कारीगरों को वह करीब एक साल पहले मेरठ लेकर आया था। यहां एक कारीगर एक दिन में दो से तीन पिस्टल बनाता है। एक पिस्टल बनाने के बदले कारीगर को दो हजार रुपये देते हैं, जबकि पिस्टल को आगे 20 से 50 हजार रुपये में बेची जाती है। आगे बदमाश इनको मोटी कीमत पर बेचते हैं।
2019 तो नहीं टारगेट
इतनी भारी संख्या में पिस्टल बरामद होने में पुलिस की लापरवाही सामने आई हैं। वहीं लोगों के जेहन में भी सवाल उठने लगे है कि कहीं 2019 लोकसभा चुनाव में उन्माद फैलाने की बड़ी साजिश तो नहीं है। इसको लेकर तरह तरह की चर्चा चल रही है।
मेरठ में बनाया नया ठिकाना
पिस्टल बिहार के मुंगेर, मध्य प्रदेश के खारगौन, धार व अन्य जगहों से आ रही थीं। चेकिंग में कई बार हथियार पकडे़ जाते थे। मुंगेर के रहने वाले सैदुल्लाह ने दिल्ली-एनसीआर में हथियारों की खपत को पूरा करने के लिए वेस्ट यूपी में हथियारों की फैक्टरी लगाने की योजना बनाई। उसने मेरठ के बदमाश फुरकान से संपर्क किया। फुरकान ने अपने घर के बेसमेंट में हथियार की फैक्टरी लगवाने की बात कही। सैदुल्लाह तीन कारीगरों का इंतजाम करके मेरठ ले आया। पिस्टलों के ज्यादातर पार्ट मुंगेर से मेरठ लाए गए। बाद में मशीनों की मदद से कारीगरों ने उन्हें जोड़कर हथियार बना दिए। ऐसे ही पार्ट लाकर उन्हें मेरठ में एसेंबल किया जा रहा था।
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