डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को झटका, मशीनों के आगे लेटे किसान
- जानी ब्लॉक के पांचली खुर्द में पहुंचे प्रोजेक्ट से जुड़े अफसरों को किसानों ने घेरा
- एक साल से किसानों के मुआवजे में हुई गड़बड़ी की चल रही है जांच
मेरठ। पश्चिम बंगाल से वाया मेरठ लुधियाना तक जाने वाले डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को करारा झटका लगा है। साल-2017 से चले आ रहे किसानों के मुआवजे प्रकरण को सुलझाया नहीं गया है। जिसका खामियाजा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की गति पर पड़ रहा है। शुक्रवार को प्रोजेक्ट से जुड़े डिप्टी चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर जेपी गोयल और डीपीएम तुफैल अहमद टीम और मशीनों के साथ जानी ब्लॉक के पांचली खुर्द गांव में पहुंचे थे। गांव में पहुंचते ही अधिकारियों की टीम को किसानों ने घेर लिया और मशीनों के आगे लेट गए। अधिकारियों ने कई बार किसानों को समझाने की कोशिश, लेकिन किसान नहीं माने। आखिरकार वहां से अधिकारियों को लौटना पड़ा।
1856 किलोमीटर के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में किसानों ने 19 करोड़ रुपये के मुआवजे में गड़बड़ी का आरोप लगा रखा है। जिस पर फाइनल रिपोर्ट आनी है। शुक्रवार को गांव में प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए पहुंची जेसीबी, ग्लाइडर आदि मशीनों को वहां से हटाया गया। प्रधान अनिल का कहना था कि जब तक मुआवजा का मामला नहीं निपटेगा कार्य शुरू नहीं किया जा सकता। इस दौरान ह्दयराम, धर्मदत्त फेरु, सुमित्रा सहित अन्य किसान मौजूद रहे। बता दें कि 13 मार्च को अमर उजाला ने ‘मुआवजे पर ग्रहण’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
दूसरी जांच में भी पहली रिपोर्ट के तथ्य
किसानों ने बताया कि 3 जनवरी 2019 में वर्तमान कमिश्नर अनीता सी मेश्राम ने कमेटी बनाकर जांच करने के आदेश दिए थे। इसकी जांच अपर आयुक्त और एडीएम एलए को सौंपी गई थी। शुक्रवार को रेलवे की ओर से जो रिपोर्ट किसानों को सौंपी गई उसमें पहली रिपोर्ट के तथ्य ही जोड़े गए हैं। किसानों का कहना है कि पहली रिपोर्ट के गलत होने के बाद ही दूसरी बार जांच कराई गई है, लेकिन इसमें भी अपर आयुक्त ने गड़बड़ी कर दी है। किसानों ने अपर आयुक्त पर आरोप लगाते हुए कहा कि कमिश्नर के निर्देशानुसार रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है।
यह है मामला
साल-2017 में कमिश्नर डॉ.प्रभात कुमार के समय किसानों ने मुआवजे में हुई गड़बड़ी की शिकायतें दर्ज कराईं थीं। किसानों ने भाजपा नेता पर जमीन अधिग्रहण कराकर मुआवजा लेने का आरोप लगाया था। पांचली खुर्द गांव में खसरा नंबर 166, 334 और 335 में घोटाले के आरोप लगाए गए। इसके बाद कमिश्नर ने मामले की जांच करते हुए लेखपाल और कानूनगो पर एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे। किसानों का कहना था कि भूमाफियों के साथ अधिकारियों ने मिलीभगत कर करोड़ों रुपये का मुआवजा बांट दिया है। किसानों का कहना था कि रेलवे की ओर से हमारे खाते खुलवाए गए थे।
यह है प्रोजेक्ट
इस परियोजना के शुरू होने के बाद मालगाड़ियों की रफ्तार तेज होगी। वहीं, एक स्थान से दूसरे स्थान तक सामान ले जाने में आसानी होगी। खुर्जा से बुलंदशहर के बीच चल रहे इस कॉरिडोर का ट्रैक फाउंडेशन तैयार हो चुका है। अब इसकी शुरुआत मेरठ में की जानी है। खुर्जा से सहारनपुर के बीच 222 किलोमीटर का ट्रैक डाला जाना है।
किसानों ने किया आत्मदाह का एलान
किसानों का कहना है कि अगर हमारी मुआवजे की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आत्मदाह करेंगे। खसरा नंबर 334 के किसान ह्दय राम ने कहा कि प्रशासन को मुआवजा दिलाना होगा। उन्होंने बताया कि खसरा संख्या 166 पर किसान मशीनों के आगे लेट गए। वहीं, आगे भी कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा।