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घूसखोरी के मिले पुख्ता प्रमाण, हर कोई हैरान

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घूसखोरी के मिले पुख्ता प्रमाण, हर कोई हैरान
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- सोमवार को आवेदन किए गए 25 फार्मों पर जारी गईं डिग्रियां
- रोजाना 30 से 40 प्रमाण पत्रों में ली जा रही थी घूस
- कई घंटे तक कुलपति ने की सभी अधिकारियों के साथ बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। सीसीएसयू में मंगलवार को कुलपति ने सारा रिकॉर्ड अपने कार्यालय मंगाया तो डिग्री और प्रमाण पत्रों में घूसखोरी का खेल देखकर अधिकारियों से लेकर कर्मचारी तक हैरान रह गए। 30 से 40 प्रमाणपत्र रोजाना आवेदन करने वालों के जारी किए जा रहे थे। अकेले सोमवार को 25 डिग्री तुरंत आवेदन करने वालों को जारी की गई। इस खेल में गोपनीय विभाग के कई कर्मचारियों के अलावा कौन अधिकारी लिप्त हैं, इसका राजफाश होने के बाद और बड़ी कार्रवाई होगी। कई घंटे तक इसको लेकर कुलपति ने तमाम अधिकारियों के साथ बैठक की। वहीं, कैंपस में कर्मचारियों का कहना है कि ऐसा करने वालों को सजा मिलनी चाहिए। कुछ कर्मचारियों की वजह से सबका नाम बदनाम होता है।
भ्रष्टाचार के इस पूरे खेल को दरअसल में गोपनीय विभाग के कुछ कर्मचारी ही अंजाम दिला रहे हैं। इन्हीं के संपर्क में रहने वाले बाहर से शिकार तलाशते हैं और फार्म लाकर कर्मचारी को दे देते हैं। कर्मचारी शाम साढ़े चार बजे उन फार्मों को अपने गुर्गों को बुलाकर थमा देते हैं। इनमें कई गुर्गे तो बाहर चाय वाले तक हैं। कई कर्मचारियों का दावा था कि बाहरी दलाल इस काम को अंजाम दे रहे हैं। लेकिन जब मंगलवार को कुलपति ने सारा रिकॉर्ड मंगवाया तो हर कोई हैरान रह गया। साफ हो गया कि गोपनीय विभाग से ही सारी गड़बड़ी चल रही है। अकेले सोमवार को ही 25 डिग्री के फार्म ऐसे मिले जिनका आवेदन सोमवार को ही किया गया था। इसके अलावा पिछले कई दिनों का रिकॉर्ड मंगवाया तो उसमें भी 25 से 40 तक ऐसे फार्म मिले जिनके आवेदन डिग्री दिए जाने वाले दिन ही किए गए थे। इन फार्मों पर हस्ताक्षर करते वक्त किसी भी कर्मचारी या अफसर ने क्यों नहीं देखा। पुराना बैकलॉग होते हुए उसी दिन वाली डिग्रियां आखिर कैसे बन गईं। इस पूरे प्रकरण में आठ से 10 कर्मचारी अभी और फंस सकते हैं। कमेटी को इन कर्मचारियों से स्पष्ट पूछना पड़ेगा कि आखिर उन्होंने इन डिग्रियों को बनाया तो कैसे बनाया। क्यों बनाया? ये बाहर सीधे छात्रों के हाथों में कैसे पहुंच गए। इन सवालों का किसी भी कर्मचारी के पास जवाब नहीं है।
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इन पर भी कार्रवाई जरूरी
मंगलवार को कैंपस में इस प्रकरण की चर्चा रही। तमाम कर्मचारियों ने कहा कि जो जैसा करेगा, वैसा ही भरेगा। यूनिवर्सिटी का नाम खराब करने वाला कोई भी हो, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। कर्मचारियों का कहना था कि कुलपति ने सही एक्शन लिया है। लेकिन यह कार्रवाई तो छात्र समस्या केंद्र वालों पर हुई है। जो गोपनीय विभाग में खेल कर रहे थे, उनको भी सजा देनी चाहिए।
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