सोया निजाम, दूषित पानी से एक साल में चली गईं 400 जान
हापुड़ रोड पर मीट फैक्टरियों के कारण आसपास के 25 गांवों में फैली भयंकर बीमारियां
स्वास्थ्य विभाग की टीम कर रही हवाई सर्वे, गांवों में जाकर नहीं की लोगों से बात
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ/खरखौदा। मेरठ में मीट के कारोबार में पिछले सालों में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। जैसे-जैसे यह कारोबार बढ़ता गया, वैसे ही मीट फैक्टरियों के आसपास के गांवों में मौतों का ग्राफ भी बढ़ता गया। अमर उजाला की टीम ने ऐसे गांवों में जाकर देखा, तो भयावह सच्चाई सामने आई। लोगों की मौतें तो हो ही रही हैं, साथ ही वे बुरी तरह बीमार भी हो रहे हैं। मीट फैक्टरियों का पानी सीधे जमीन में बोरिंग किया जा रहा है। पिछले एक साल में ही करीब 400 मौतें हो चुकी हैं, जिनमें से कुछ का प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने संज्ञान लिया है। बाकी मौतें कागजों में नहीं, सिर्फ ग्रामीणों के जेहन में हैं।
पिछले 20 सालों में हापुड़ रोड मीट कारोबार का बड़ा केंद्र बन गया है। पिछले 10 साल में तो यह कारोबार आसमान छूने लगा। खास तौर पर अलीपुर गांव व आसपास के पूरे क्षेत्र में आज मीट फैक्टरियां हैं, जिनमें से कई तो अवैध हैं। यहां से विदेशों तक मीट सप्लाई किया जाता है। वहीं मेरठ शहर से लेकर गांव फफूूंडा व इससे आगे तक मीट कारोबारियों से जमीन खरीद रखी है।
पीने के पानी को बना दिया जहर
इन फैक्टरियों ने आसपास के गांवों के पेयजल को जहर बना दिया है। कई मीट फैक्टरियों में कटान के बाद दूषित पानी बोरिंग के जरिये सीधे जमीन में उतारा जा रहा है। जहां ईटीपी लगे हैं, वहां मॉनीटरिंग नहीं हो रही है। दूषित पानी को खेतों में भी डाला जात रहा है। इससे दूषित पानी के तालाब बन गए हैं। फैक्टरी संचालकों ने आसपास के खेत खरीद लिए हैं या किराए पर ले लिए हैं, जिनमें पानी डाला जा रहा है।
फैल रही घातक बीमारी
हापुड़ रोड पर बसे गांवों के लोगों का कहना है कि 20 वर्ष पहले इस रोड पर कोई मीट फैक्ट्री नहीं थी। जैसे ही मीट फैक्ट्री लगीं, उसके एक-दो साल में ही करीब 25 गांवों में घातक बीमारियां फैल गईं। पिछले 10 साल में तो स्थिति बदतर हो गई है। कैंसर, पीलिया, हेपेटाइटिस बी, किडनी संबंधी बीमारियों ने लोगों को गिरफ्त में ले लिया। क्षेत्र में 80 प्रतिशत मौतों का कारण यह दूषित पानी ही है। आरोप है कि सरकारी मशीनरी मीट फैक्टरी संचालकों के पक्ष में खड़ी है।
कारोबारियों को राजनीतिक संरक्षण
कई बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इन फैक्टरियों में छापेमारी की, लेकिन कारोबारियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी। अब मेरठ शहर समेत हापुड़ रोड स्थित लोहियानगर, काजीपुर, घोसीपुर, नरहाड़ा, हाजीपुर, अल्लीपुर, चिंदौड़ी, फफूंडा, बिजौली, खरखौदा, छतरी, खड़खड़ी, कौल, बवनपुरा, अतराड़ा, पांची, कैली व धीरखेड़ा समेत सभी गांवों में गंभीर बीमारियों से ग्रामीणों की मौत हो रही हैं। इन सभी गांवों में हैंडपंपों का पानी 10 वर्ष पहले ही खराब हो चुुका है। कई गांवों में पानी के लिए टंकी लगी हैं, लेकिन कई गांवों के लोग हैंडपंपों का पानी पीने को मजबूूूर हैं।
एक वर्ष में मौत और बीमारी के आंकडे़
गांव का नाम आबादी मृतक बीमारों की संख्या
जाहिदपुर 10000 25 20
हाजीपुर 1400 15 12
नरहाड़ा 8000 20 18
अल्लीपुर 10000 80 30
जलालपुर 1000 12 10
फफूंडा 9000 40 22
बिजौली 10000 30 26
खरखौदा कस्बा 25000 50 22
छतरी 3000 18 6
उलधन 6000 20 12
बहरानपुर 2000 40 5
खासपुर 3000 20 4
कैली 8000 30 12
(ग्रामीणों ने अपने गांव के आंकड़े दिए और मरने वालों के नाम भी बताए)
वर्जन
करीब 10 साल पहले गांव में कोई बीमारी नहीं थी। लेकिन अब तो कई सालों से लगातार मौतें हो रही हैं। प्रशासन हमारे गांव की तरफ देखने को भी तैयार नहीं है। - शाहिद खां, ग्राम प्रधान हाजीपुर
मीट व्यापारी दूषित पानी की जमीन में बोरिंग कर रहे हैं। फैक्टरी से निकलने वाला पानी ये लोग खुद क्यों नहीं पीते हैं। ये रोजगार नहीं, मौत बांट रहे हैं। - कुसुम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य
यदि मीट फैक्टरियों को जल्द ही इस क्षेत्र से नहीं हटाया गया, तो महामारी जैसी स्थिति आ जाएगी। तब इससे निपटना बड़ी चुनौती होगी।
- देवेंद्र शर्मा, ग्राम प्रधान खासपुर
एक वर्ष में हमारे गांव के करीब 20 लोगों की मौत हो चुकी है। भूजल खराब हो गया है। अब गांव में टंकी का निर्माण कराया जा रहा है। - इकबाल खां, ग्राम प्रधान उलधन
सो रही स्वास्थ्य विभाग की टीम
कस्बा सहित सभी गांवों के ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले दस वर्षों में गांव में ज्ञात और अज्ञात बीमारी से सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। लेकिन आज तक स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव आकर सुध नहीं ली है। वहीं स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि गांवों में जाकर रिपोर्ट बनाई है, लेकिन ग्रामीणों ने इससे इंकार किया।
वर्जन
पहले काली नदी के आसपास के गांवों का सर्वे कराया जाता था। अब मामले ने तूल पकड़ा है, तो मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी के आदेश पर गांव-गांव जाकर सर्वे किया गया है। खास तौर से ऐसे गांव जहां कैंसर जैसी घातक बीमारियों से मौत हुई हैं, वहां ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे सभी गांवों की रिपोर्ट बनाकर सीएमओ को भेजी जाएगी।
- डा. आरके सिरोहा, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी खरखौदा