मेरठ। सीसीएसयू ग्रेजुएशन में सत्र 2017-18 में हुए दाखिलों की जांच करेगी। कंपनी को ऑनलाइन डाटा का वेरिफिकेशन करने का निर्देश दे दिया गया है। कंपनी जितने रजिस्ट्रेशन हुए और ऑनलाइन जितने दाखिले कंफर्म हुए हैं, उनकी जांच करेगी। संदिग्ध केस पाए जाने पर उनका वेरिफिकेशन संबंधित कॉलेज में भी कराया जाएगा। यह प्रक्रिया पिछले साल भी की गई थी। कुछ फर्जी दाखिले पकड़े गए थे।
एडेड और राजकीय कॉलेजों में दाखिले बंद हो चुके हैं। इस वक्त छात्र दो बातों की मांग कर रहे हैं। फर्जी दाखिलों की जांच और ईवनिंग क्लास शुरू हों। फर्जी दाखिले की शिकायत पर विश्वविद्यालय ने काम करना शुरू कर दिया है। ऑनलाइन दाखिला प्रक्रिया कर रही कंपनी को निर्देश दिया गया है कि वह अन्य बोर्ड के हुए दाखिलों की अपने डाटा के हिसाब से जांच कर संदिग्ध या फर्जी केस की पहचान करे। विवि ने दाखिले से पहले यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड से 12वीं के रिजल्ट का लिंक लिया था। इससे फायदा यह हुआ कि इन बोर्ड के छात्रों के डाटा का तो ऑनलाइन वेरिफिकेशन हो गया। लेकिन अन्य बोर्ड से आए छात्रों का नहीं हो पाया।
दरअसल शिकायत यह है कि अन्य बोर्ड के आधार पर होने वाले दाखिलों में गड़बड़ी हुई है। रजिस्ट्रेशन में गलत डाटा दिया गया है। इसकी जांच की जा रही है। नंबर, विषय, माता-पिता के नाम, डेट ऑफ बर्थ और सीरियल नंबर आदि से इसकी जांच की जा रही है। संदिग्ध केस का वेरिफिकेशन जिस कॉलेज में उसका दाखिला होगा, वहां से कराया जाएगा। मेरठ और सहारनपुर मंडल के सभी कॉलेजों के दाखिले इस दायरे में होंगे।
खिलाड़ियों ने की दाखिले की मांग
मंगलवार को खिलाड़ियों का एक प्रतिनिधिमंडल रजिस्ट्रार दीप चंद्र से मिला। उन्होंने स्पोर्ट्स कोटे में दाखिले की मांग की। खिलाड़ियों ने कहा कि ट्रायल देने के बाद ज्यादातर खिलाड़ियों ने बीए के लिए आवेदन किया था। नियम मुताबिक दो प्रतिशत सीटों पर ही दाखिला हो सकता था। जिन खिलाड़ियों ने ट्रायल दिया है और उनकी योग्यता है तो बीए के अलावा बीकॉम और बीएससी कोर्स में उनको दाखिले का मौका दिया जाएगा। विवि इस पर विचार कर रहा है।