मेरठ। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर अभी भी व्यापारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को जीएसटी को लेकर रजिस्ट्रेशन में हुई कमियों को दूर करने का आखिरी दिन था, जिस कारण राज्य वस्तु एवं सेवा कर कार्यालय में 30 से ज्यादा व्यापारी समस्याओं को लेकर पहुंचे। किसी का पैन कार्ड मिसमेच हो रहा था, तो किसी का डैशबोर्ड नहीं खुल रहा था।
कई व्यापारी ऐसे थे, जो जीएसटी पोर्टल पर माइग्रेट या एक्टीवेट हो चुके हैं, लेकिन उन्हें ‘कैंसेल्ड’ लिखा हुआ दिख रहा था। ऐसे व्यापारियों ने खंड अधिकारी के पास जाकर अपना संशोधन कराया। हालांकि अब संशोधित डाटा मुख्यालय स्वीकार नहीं करेगा, क्योंकि संशोधन कराने की 30 अगस्त आखिरी तारीख थी।
दूसरी तरफ, जिले में अभी भी सैकड़ों व्यापारी बचे हैं, जिन्होंने जीएसटी के तहत पंजीकरण नहीं कराया है। हालांकि राज्य वस्तु एवं सेवा कर के एडिशनल कमिश्नर वीएन सिन्हा का कहना है कि 20 लाख से ज्यादा टर्नओवर रखने वाले करीब 95 प्रतिशत व्यापारी पंजीकरण करा चुके हैं। जिन्होंने पंजीकरण नहीं कराया है, उन्हें न तो समाधान योजना का लाभ मिलेगा और न ही वे रिटर्न जमा कर पाएंगे। गौरतलब है कि समाधान योजना की आखिरी तारीख 16 अगस्त बीत गई है। जुलाई माह का टैक्स जमा करने की अंतिम तिथि 25 अगस्त थी। जिन व्यापारियों को 30 जून से पहले की कोई आईटीसी लेनी थी, उनके लिए टैक्स जमा करने की अंतिम तिथि 28 अगस्त थी। पूरे देश में एक जुलाई से जीएसटी लागू हो चुकी है।
ई-वे बिल को लेकर चेकिंग शुरू
इलेक्ट्रानिक-वे बिल (ई-वे) को लेकर राज्य वस्तु एवं सेवा कर की प्रवर्तन विभाग ने चेकिंग शुरू कर दी है। जो व्यापारी वाहनों में दूसरे राज्यों से सामान ला रहे हैं, प्रवर्तन टीम उनका ई-वे बिल चेक रही है। एडिशनल कमिश्नर ने बताया कि जो लोग बिना ई-वे बिल के मिलेंगे, उन पर कार्रवाई होगी। इस दौरान कई व्यापारियों पर कार्रवाई भी की गई है। तीन तरह के ईवे बिल को व्यापारियों को भरना होगा। तभी सामान को एक राज्य से दूसरे राज्य भेजा जा सकेगा या फिर मंगाया जा सकेगा।
जीएसटी में पंजीकृत व्यापारी के साथ ही कारोबार करने में फायदा
राज्य वस्तु एवं सेवा कर के अधिकारियों ने बताया कि जीएसटी में पंजीकृत व्यापारियों के साथ ही कारोबार करने में कारोबारियों को फायदा है। दरअसल, विक्रेता पंजीकृत कारोबारी द्वारा जीएसटी रिटर्न दाखिल करने और देय टैक्स की धनराशि जमा करने पर ही खरीदार को आईटीसी का लाभ मिलेगा। अपंजीकृत, समाधान योजना और टैक्स फ्री वस्तुओं पर कारोबार करने वालों को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा।
क्या है समाधान योजना
जिन डीलरों का सालाना टर्न ओवर 75 लाख तक है, वह एकमुश्त समाधान योजना का लाभ ले सकते हैं। कारोबारी को एक प्रतिशत, उत्पादक को दो प्रतिशत एवं रेस्टोरेंट सेवा पर पांच प्रतिशत जीएसटी देना है। योजना का लाभ लेने वालों को कर तथा रिटर्न तिमाही दाखिल करना है, जो डीलर इस योजना का लाभ लेंगे, वह ग्राहकों से कर नहीं ले सकते। न ही उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ मिलेगा।
खास बात
- जीएसटी को लेकर करना पड़ रहा व्यापारियों को दिक्कतों का सामना
- बुधवार को रजिस्ट्रेशन में हुई कमी को दूर कराने का था आखिरी दिन