शत्रु संपत्तियों पर अब सरकार का मालिकाना हक होगा। इस संबंध में लोकसभा में विधेयक पारित होने के बाद ऐसी तमाम संपत्तियों पर चले आ रहे विवाद निपटने का रास्ता साफ हो गया है। इस संपत्ति की अपनी भौगोलिक स्थिति के अनुसार कीमत है। कहीं पर 18 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर, तो कहीं इसकी कीमत 8 करोड़ रुपये तक है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार मेरठ में कुल शत्रु संपत्तियों की कीमत दो अरब रुपये से ज्यादा है। हर साल 11.51 लाख रुपये लगान के रूप में राजस्व विभाग को इस संपत्ति से प्राप्त होते हैं।
ये होती है शत्रु संपत्ति
जो लोग बंटवारे के दौरान पाकिस्तान जाकर बस गये थे, उनकी जमीन आज भी भारत में है। इस जमीन को शत्रु संपत्ति कहा जाता है। इस पर आज भी पाकिस्तान गए लोगों के रिश्तेदार या कुछ भूमाफिया कब्जा किए बैठे हैं। मेरठ में इस तरह की 36 शत्रु संपत्तियां सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं। पांच संपत्तियों का वैधानिक तरीके से निस्तारण हो चुका है। जबकि 31 संपत्तियां पर अभी भी कब्जा है।
सबसे ज्यादा संपत्ति मेरठ तहसील में
शत्रु संपत्तियों का विवरण तहसीलवार जुटाया जाता है। मेरठ तहसील में 25, मवाना में 6 और सरधना में 5 शत्रु संपत्तियां है। इनमें मेरठ में तीन और सरधना व मवाना में एक-एक संपत्ति का निस्तारण हो चुका है। बात अगर क्षेत्रफल की करें तो मवाना तहसील में 23.4140 हेक्टेयर, सरधना में 13.3010 और मेरठ में 5.2375 हेक्टेयर शत्रु संपत्ति हैं।
छह संपत्तियों पर चल रहा वाद
जनपद में छह शत्रु संपत्ति ऐसी भी हैं, जिन्हें लेकर कोर्ट में वाद चल रहा है। इनमें चार संपत्तियां मेरठ की हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार ये संपत्तियां रिहायशी इलाके में हैं, जिनकी कीमत करोड़ों में हैं।
मुजफ्फरनगर, शामली में सबसे ज्यादा संपत्तियां
शत्रु संपत्ति संशोधन विधेयक के लोकसभा में पास होने के बाद अब पाकिस्तान या चीन में बस चुके लोगों का भारत में उनकी संपत्ति पर मालिकाना हक नहीं होगा। पूरे देश में 2168 शत्रु संपत्तियां दर्ज हैं, जिनमें अकेले 1468 यूपी में हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बात करें तो मुजफ्फरनगर और शामली में सबसे ज्यादा शत्रु संपत्तियां हैं।