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Meerut News: बालिका से दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष का कारावास

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मेरठ। न्यायालय अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम शिवानी सिंह प्रथम ने बालिका से दुष्कर्म के दोषी मोहम्मद जाहिद उर्फ गुल्लू निवासी किदवई नगर मेरठ को 20 वर्ष के कारावास और 30 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया।
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अभियोजन के अनुसार, थाना लिसाड़ी गेट पर 8 जनवरी 2024 को पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि उनकी 10 साल की मासूम बेटी से आरोपी पिछले डेढ़ माह से दुष्कर्म कर रहा है। उसने किसी को बताने पर उसे जान से मारने की धमकी दी थी। इसकी सूचना पीड़िता ने अपने पिता को दी। अभियोजन ने अपने मुकदमे को साबित करने के लिए न्यायालय में आठ गवाह आरोपी के खिलाफ पेश किए। शनिवार को न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनकर तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मोहम्मद जाहिद उर्फ गुल्लू को दोषी पाते हुए सजा सुनाई


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दुष्कर्म कर किशोरी की हत्या करने वाले चार दोषी करार
मेरठ। न्यायालय अपर जिला जज पॉक्सो अधिनियम मोहम्मद बाबर खान ने किशोरी दुष्कर्म कर हत्या करने के आरोप में चार आरोपी लखन उर्फ अभय, विकास, रॉबिंस कुमार उर्फ रॉबिन व रोहित उर्फ राजा उर्फ रॉकी निवासी गांव कपसाड़ को दोषी करार दिया है। सजा पर सुनवाई के लिए न्यायालय ने 11 फरवरी की तारीख नियत की है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, सरधना के गांव कपसाड़ के रहने वाले ग्रामीण ने थाना सरधना पर 21 अप्रैल 2021 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था उसकी नाबालिग भतीजी ट्यूशन पढ़ने के लिए गई हुई थी जो शाम तक वापस नहीं आई। उसकी तलाश की गई तो पीड़िता बदहवास हालत में मिली और उसने अपने माता-पिता को बताया कि चारों आरोपियों ने उसके साथ दुष्कर्म किया और उसे जान से मारने की नीयत से जहर पिला दिया। इसके बाद गंभीर हालत में उसके घर वाले पीड़िता को लेकर अस्पताल गए जहां दौरान उपचार पीड़िता की मौत हो गई थी। इस मामले में न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ 12 गवाह पेश किए। न्यायालय ने शनिवार को दोनों पक्षों को सुनकर साक्ष्यों के आधार पर चारों आरोपियों को दोषी करार दिया। सजा पर सुनवाई के लिए 11 फरवरी की तारीख नियत कर दी है।

अनुज शर्मा की जमानत याचिका खारिज
मेरठ। न्यायालय अपर जिला जज कोर्ट संख्या- 2 आलोक द्विवेदी ने सत्यकाम एजुकेशनल ट्रस्ट विवाद में आरोपी प्रबंधक अनुज शर्मा की जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी के अधिवक्ता के अनुसार, ट्रस्ट के प्रबंधक अनुज शर्मा को मुकदमों में फर्जी हस्ताक्षर और फर्जी कागज तैयार करने की धाराओं में कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया था। इसके बाद उनके अधिवक्ता ने न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्र दायर किया था। न्यायालय से दलील दी थी कि आरोपी को इस मुकदमे में झूठा फंसाया जा रहा है। उनके निर्दोष होने के साक्ष्य न्यायालय में पेश किए। न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्र का अभियोजन द्वारा कड़ा विरोध किया गया और उनके दोषी होने के साक्ष्य न्यायालय में पेश किए। शनिवार को न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनकर जमानत का पर्याप्त आधार न पाते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।
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