प्रदेश सरकार द्वारा लघु एवं सीमांत किसानों के वित्तीय वर्ष 2016-17 का 1 लाख रुपये तक का फसली ऋण माफ करने का फैसला किसानों के लिए अच्छे दिन लेकर आया है। कैबिनेट के फैसले से जनपद के करीब ढाई लाख किसानों को लाभ होगा। इन किसानों पर करीब 3 हजार करोड़ रुपये का ऋण है। किसान नेताओं और किसानों ने फैसले का स्वागत किया है। वहीं गेहूं के एमएसपी और उस पर दस रुपये बोनस को बेहद कम बताया है।
भाजपा ने अपने लोक कल्याण संकल्प पत्र 2017 (चुनावी घोषणा पत्र) में किसानों के लिए कई बड़े वादे किए थे। इनमें कैबिनेट की पहली बैठक में ही प्रदेश के सीमांत और लघु किसानों का कर्ज माफ करना, गन्ना किसानों का बकाया भुगतान 14 दिन के अंदर कराना शामिल था। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने मंगलवार को कैबिनेट की पहली बैठक बुलाई। इस बैठक में प्रदेश के किसानों के साथ जनपद के किसानों के अलावा सभी राजनीतिक दलों की नजर लगी थी। बैठक में लघु एवं सीमांत किसानों का 1 लाख रुपये तक के कर्ज माफी की सूचना मिलते ही किसान झूम उठे।
3 हजार करोड़ का है ऋण
जनपद के लीड बैंक और जिला सहकारी बैंक से मिले आंकड़ों के अनुसार कामर्शियल और जिला सहकारी बैंकों का करीब तीन हजार करोड़ रुपया फसली कर्ज है। उन्होंने यह किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के जरिये लिया हुआ है। जनपद के कामर्शियल बैंकों से करीब 2 लाख 60 हजार किसानों ने 2450 करोड़ रुपया ऋण लिया है। इसमें करीब ढाई लाख सीमांत और लघु किसानों पर 2210 करोड़ रुपया कर्ज है। इसके अलावा करीब 99 हजार किसानों ने जिला सहकारी बैंकों से भी 720 करोड़ रुपया कर्ज लिया हुआ है।
संपूर्ण कर्ज करना चाहिए था माफ
लघु एवं सीमांत किसानों का एक लाख रुपये तक का कर्ज माफ करने का वह स्वागत करते हैं। लेकिन वादे के अनुसार संपूर्ण कर्ज माफ करना चाहिए था। देशभर के किसानों की हालत खराब है। -चौ. राकेश टिकैत, राष्ट्रीय प्रवक्ता भाकियू
लोन माफी के लिए दिया था वोट
भाजपा ने लघु और सीमांत किसानों का संपूर्ण लोन माफ करने के लिए वोट लिया था। अब केवल एक लाख तक की सीमा निर्धारित की है। अधिकतर किसानों पर एक लाख से ज्यादा का कर्ज है। -डॉ. राजकुमार सांगवान, पूर्व संगठन प्रभारी
किसानों को मिलेगी संजीवनी
एक लाख रुपये तक का ऋण माफ होने से प्रदेश के किसानों को संजीवनी मिलेगी। कर्ज के चलते किसान आत्महत्या करने को विवश है। सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं। पीएम और सीएम बधाई के पात्र हैं। -कुलदीप त्यागी, अध्यक्ष भारतीय किसान आंदोलन