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एक दिन में मिले स्वाइन फ्लू के 20 मरीज

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इस साल मरीजों की संख्या पहुंची 300 के पार
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मेरठ में मिल चुके 214 मरीज

मेरठ। स्वाइन फ्लू रुकने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को 20 नए मरीजों को स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इनमें 13 मरीज मेरठ हैं, चार मरीज बागपत, दो अमरोहा और एक नोएडा का रहने वाला है। इनमें एक महिला चिकित्सक समेत नौ महिलाएं और दो बच्चे भी शामिल हैं। इनका इलाज सरकारी और निजी अस्पतालों में चल रहा है। 58 सैंपलों की जांच हुई थी।
नए मरीजों में मेरठ से अहमदनगर कांच का पुल, आदेश नगर, ईश्वरपुरी, लिसाड़ी गेट, अहमदनगर, हस्तिनापुर, शास्त्रीनगर, पुलिस लाइंस, जागृति विहार, दौराला, सदर बाजार, ब्रह्मपुरी और कंकरखेड़ा आदि स्थानों के रहने वाले हैं। मरीजों की उम्र डेढ़ साल से लेकर 85 साल तक है। इस सीजन में नवंबर से अब तक स्वाइन फ्लू से पीड़ित मेरठ के पांच मरीजों की मृत्यु हो चुकी है। साल 2017 में स्वाइन फ्लू के करीब 395 मरीज मिले थे, जिनमें से 21 लोगों की मौत हो गई थी। साल 2018 में मेरठ में 68 मरीज मिले थे और इस साल अब तक 307 मरीज मिल चुके हैं। इनमें मेरठ के 214 मरीज हैं। इन्हें मेडिकल की माइक्रोबायोलॉजी लैब में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग लोगों में जागरूकता लाने के लिए लगातार अभियान चला रहा है, मगर यह अभियान भी नाकाफी साबित हो रहे हैं। मरीजों के मिलने का सिलसिला लगातार जारी है।
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स्वाइन फ्लू का खौफ

मरीज मिल रहे रोज, वजन के हिसाब से दी जाएगी डोज
स्वाइन फ्लू के जिस तरह मरीज लगातार मिल रहे हैं, उसी तरह लोगों में स्वाइन फ्लू को लेकर खौफ भी बढ़ता जा रहा है। स्वाइन फ्लू के मरीजों या स्वाइन फ्लू पीड़ित के साथ रहने वाले मरीजों के लिए स्वास्थ्य विभाग टेमी फ्लू या ओसेल्टामिविर की दवा देता है। इस दवा की मरीज को कितनी डोज देनी है। इसके लिए उम्र और वजन के हिसाब से गाइडलाइंस जारी की गई है, ताकि दवा का सेवन कर लोग लाभ ले सकें।

स्वाइन फ्लू को अब एन्फ्लूएंजा एच1एन1 बोलिए
स्वास्थ्य विभाग की एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. रचना टंडन ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जो गाइडलाइंस जारी की गई है, उनमें स्वाइन फ्लू को एन्फ्लूएंजा एच1एन1 लिखा गया है। पहले इसे स्वाइन फ्लू लिखा जाता था। शुरू में यह शूकर में मिला था, इसलिए इस रोग का नाम स्वाइन फ्लू पड़ा था, लेकिन पिछले कुछ सालों से यह मनुष्यों से मनुष्यों में फैल रहा है। इस कारण इसके नाम में बदलाव किया गया है। इसका वायरस हवा में तैरता रहता है, जो तापमान कम होने पर सक्रिय हो रहा है।

असर कर रही टेमी फ्लू
स्वास्थ्य विभाग के अलावा जिन मरीजों या तीमारदारों को टेमी फ्लू की दवाइयां दी गई हैं, उनमें अधिकांश को टेमी फ्लू खाने से लाभ मिला है। जागृति विहार, शास्त्रीनगर, मेडिकल कैंपस, बुढ़ाना गेट और लिसाड़ी गेट के मरीजों और तीमारदारों ने बताया कि उन्हें स्वास्थ्य विभाग ने टेमी फ्लू की दवाइयां दी थीं। इससे उन्हें लाभ मिला है। कई मरीजों ने बताया कि उन्हें लग रहा था कि उनके साथ परिजन भी बीमार न पड़ जाएं, मगर टेमी फ्लू खाने के बाद उन्हें स्वाइन फ्लू नहीं हुआ। सीएमओ डॉ. राजकुमार ने भी इसकी पुष्टि की है। हालांकि उनका कहना है कि टेमी फ्लू की दवा खाने से पहले चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।
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स्वास्थ्य विभाग निशुल्क देता है दवा
स्वाइन फ्लू से पीड़ित मरीज और उनसे जुड़े लोगों को स्वास्थ्य विभाग टेमी फ्लू की दवा निशुल्क देता है। यह मरीज को इस संक्रमण से लड़ने में मदद करती है। इसके अलावा कुछ मरीज चिकित्सक की दवा के साथ-साथ टेमी फ्लू की भी डोज ले रहे हैं।

टेमीफ्लू या ओसेल्टामिविर की डोज
- 15 से 23 किलोग्राम तक 45 एमजी
- 24 से 40 किलो तक 60 एमजी
- 40 किलोग्राम से ज्यादा 75 एमजी
- 3 माह के शिशु को 12 एमजी
- 3-5 माह उम्र के शिशु को 20 एमजी
- 6 से 11 माह तक के शिशु को 25 एमजी
(पांच दिन का है दवा का कोर्स)
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