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तुरंत मिल जाए इलाज तो बचाई जा सकती है जान

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तुरंत मिलें इलाज तो बचाई जा सकती है जान
- मिथाइल अल्कोहल ने नर्वस सिस्टम किया निष्क्रिय
- दो-तीन घंटे के अंदर दी जाए फॉमेपिजोल
- चिकित्सक देर से अस्पताल लाना मान रहे इतनी मौतों का कारण
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। सहारनपुर में जहरीली शराब से हुई मौतों से प्रदेशभर में हड़कंप मचा है। चिकित्सकों का मानना है कि इस तरह की शराब में मिथाइल अल्कोहल की मात्रा ज्यादा होती है, जिस कारण इसे पीने वाले का नर्वस सिस्टम निष्क्रिय हो जाता है। अगर घंटों तक इलाज न मिले तो जान जाने का खतरा रहता है। मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर हर्षवर्धन बताते हैं कि अगर ऐसे मरीजों को दो-तीन घंटे के भीतर ही फॉमेपिजोल नामक इंजेक्शन लगा दिया जाए तो ऐसे लोगों की जान बचाने में आसानी हो सकती है।
उन्होंने बताया कि यह दवा मिथाइल अल्कोहल से हो रहे शरीर के नुकसान को कम कर देती है। मेडिकल इमरजेंसी के चिकित्सकों और अन्य स्टाफ का मानना है कि जिन 17 मरीजों की मौत मेडिकल इमरजेंसी में हुई है, उनमें अधिकांश की मौत का कारण उन्हें अस्पताल देर से लाना रहा है। अगर तुरंत ही उन्हें फॉमेपिजोल दवा दे जाती तो उससे काफी लाभ मिलता। इन मरीजों को सहारनपुर से रेफर कराकर यहां लाया गया था, जिस कारण तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। बाकी 18 मरीजों का यहां उपचार चल रहा है। उनमें भी पांच मरीज गंभीर हैं, लेकिन उन्हें स्वस्थ करने के लिए पूरी कोशिश जारी है।
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अंग्रेजी शराब में होता है इथाइल अल्कोहल
चिकित्सकों ने बताया कि अंग्रेजी शराब में इथाइल अल्कोहल होता है, जबकि अवैध शराब में मिथाइल अल्कोहल की मात्रा मिला देते हैं, जो जहर का काम करता है। अवैध शराब में मिथाइल अल्कोहल की जो मात्रा डाली जाती है, वह भी अंदाजे से होती है, जो कम ज्यादा हो जाती है, जो नर्वस सिस्टम डिएक्टिवेट (निष्क्रिय) कर देती है। इससे सुनाई देना, दिल, किडनी, लीवर और आंखों पर फर्क पड़ता है।

मेडिकल में डॉक्टरों समेत 35 लोगों का स्टाफ कर रहा राउंड द क्लॉक ड्यूटी
आठ फरवरी की रात से मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में 18 चिकित्सकों समेत 35 लोगों का स्टाफ राउंड द क्लॉक ड्यूटी में लगा हुआ है। यह टीम सहारनपुर से आने वालों मरीजों के बारे में जानकारी करती है। मॉनिटर से उनकी पल्स रेट, ऑक्सीजन की मात्रा और ब्लड प्रेशर जांचती है। इसकेबाद जरूरत के हिसाब से भर्ती कर उनका इलाज शुरू होता है। जो गंभीर मरीज होते हैं, उन्हें ट्रॉमा सेंटर में भर्ती किया जाता है। सीएमएस डॉ. धीरज राज ने बताया कि अब 11 मरीजों का इमरजेंसी में इलाज चल रहा है। दो आईटी वार्ड में भर्ती हैं, पांच मरीज आईसीसीयू में हैं।
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इमरजेंसी में महिला ने किया हंगामा
मरीज के इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर एक महिला ने सोमवार दोपहर मेडिकल कॉलेज की इमरजेंजी में जमकर हंगामा किया। उसने चेतावनी दी कि वह अधिकारियों को फोन कर इसकी जानकारी देगी कि कितनी लापरवाही से यहां इलाज किया जा रहा है। मेडिकल स्टाफ ने महिला को समझाकर जैसे-तैसे शांत किया।
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