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कानूनों के प्रति दूसरों को करें जागरुक - एडीजे

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कानूनों के प्रति दूसरों को करें जागरूक: एडीजे
गंगानगर। एंटी रैगिंग व बच्चों के यौन अपराधों को लेकर देश में अनेक कानून बने है। जिसके लिए छात्र दूसरे लोगों को कानूनों के प्रति जागरूक करें और उन्हें ऐसे अपराधों से नुकसान के बारे में बताएं। तभी इस प्रकार के कार्यक्रम सफल होंगे। यह बात एडीजे रतनेश मनी त्रिपाठी ने ट्रांसलेम कॉलेज ऑफ लॉ में आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहीं।
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मवाना रोड ट्रांसलेम कॉलेज ऑफ लॉ में मंगलवार को विधि साक्षरता व जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि अपर जिला जज रतनेश मनी त्रिपाठी रहे। वहीं विशिष्ट अतिथियों में मुख्य न्यायिक अधिकारी अभय प्रकाश नारायण, जिला सेवा प्राधिकरण सचिव चंद्र मोहन श्रीवास्तव, सिविल जज नूहीन जैदी, अपर सिविल जज जुलकर नैन आलम रहे। शुभारंभ एडीजे रतनेश मनी त्रिपाठी व कॉलेज के चेयरमैन प्रशांत जैन ने दीप प्रज्वलित कर किया। कॉलेज की प्राचार्या डॉ. अलका सिंह ने सभी का स्वागत किया। एंटी रैगिंग व पाक्सो विषय पर बोलते हुए एडीजे रतनेश मनी त्रिपाठी ने कहा कि एंटी रैगिंग व पॉक्सो को लेकर देश में अनेक कानून बने हैं। उन पर लगातार चर्चाएं भी होती है। सबसे जरूरी है कि छात्र-छात्राएं अन्य लोगों को ऐसे कानूनों के बारे में जानकारी दें। कहा कि देश में 181 महिला हेल्पलाइन नंबर 24 घंटे काम करती है। जिला सेवा प्राधिकरण के सचिव चंद्र मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि रैगिंग पहले छात्रों के बीच परिचय मात्र था अब इसका दुरुपयोग होता है। जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट को इसे रोकने के लिए एंटी रैगिंग रेगुलेशन एक्ट 2009 का निर्माण करना पड़ा। बताया कि कॉलेज या विवि में सीनियर द्वारा जूनियर छात्र-छात्रा का मानसिक, शारीरिक उत्पीड़न रैगिंग की श्रेणी में आता है। सिविल जज जुलकर नैन आलम ने कहा कि वे सारी चीजें जो प्रताड़ना में आती है वह रैगिंग की श्रेणी में आता है। सिविल जज नूहीन जैदी ने कई केस के माध्यम से छात्र-छात्राओं को रैगिंग व पाक्सो के बारे में जानकारी दी। वहीं इससे संबंधित कानूनों के लागू होने के बारे में बताया। प्रधानाचार्य गजेंद्र सिंह तोमर ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। संचालन शुभाली चंद्रा ने किया। शेख अरशद, सुमन, शलीना, समीर, जब्बार अली का योगदान रहा। डॉ. शमीम अहमद, कमलकांत मित्तल व अभय शुक्ला आदि रहे।
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