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जयंत लड़ेंगे बागपत से चुनाव-BAGHPAT

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बागपत। कैराना सीट फतह करने के बाद वेस्ट यूपी में गठबंधन की मजबूती पुख्ता हुई है। रालोद साल 2019 के लोकसभा चुनाव में कई बड़े फेरबदल करेगा। रालोद के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी को इस बार मथुरा के बजाए बागपत के चुनावी रण में उतारने की तैयारी है। रालोद सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। रालोद इसी फार्मूले के साथ चुनाव की तैयारी में जुटा है, लेकिन अंतिम फैसला गठबंधन के सपा, बसपा और कांग्रेस की सहमति के बाद ही लिया जाएगा।
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मुजफ्फरनगर के दंगे के बाद से बिखरे जाट और मुस्लिम समीकरण के कारण रालोद के हिस्से में सियासत के कड़वे अनुभव आए हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में हार के दर्द को मोदी मैजिक और मुजफ्फरनगर दंगे का हवाला देकर कम किया जा सकता है, लेकिन साल 2017 के विधानसभा चुनाव की हार से रालोद का सियासी वजूद ही खतरे में पड़ गया । कैराना उपचुनाव की जीत के बाद अब लोकसभा चुनाव 2019 के नए समीकरण बनेंगे। वजह चाहें कुछ भी रही हो, लेकिन यह लगभग तय हो चुका है कि रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी इस बार बागपत सीट से चुनाव लड़ेंगे। साल 1977 में बागपत सीट से ही पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह लोकसभा चुनाव लड़ा और जीतकर लखनऊ के बजाए केंद्र की सियासत में पहुंच गए। चौधरी चरण सिंह के बाद चौधरी अजित सिंह ने 1989 में पहला चुनाव बागपत सीट से ही लड़ा । एक साल बाद जब 2019 में चुनाव होंगे, तब चौधरी अजित सिंह को बागपत की सियासत में पूरे तीन दशक हो जाएंगे, लेकिन इस बार रालोद जयंत चौधरी को बागपत सीट की विरासत सौंपे जाने की तैयारी में है। अब सवाल है कि चौधरी अजित सिंह कहां से चुनाव लड़ेंगे। शुरूआती चर्चा मुजफ्फरनगर से चल रही है, लेकिन इसके बाद की भूमिका गठबंधन की शुरू होती है।

तब मुजफ्फरनगर से हार गए थे चौधरी चरण सिंह

बागपत। भले ही रालोद के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह के मुजफ्फरनगर सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा और तैयारी चल रही हो, लेकिन इस सीट का इतिहास भी अनोखा है। सियासी दांव पेंच में यहां चौधरी चरण सिंह भी मात खा गए थे। किसान मसीहा चौधरी चरण सिंह ने यूपी के बजाए केंद्र की सियासत में उतरने का फैसला किया तो सीट चुनी थी मुजफ्फरनगर। वह साल 1971 का चुनाव था। बीकेडी के टिकट पर मैदान में उतरे चौधरी चरण सिंह सीपीआई के विजयपाल सिंह हार गए थे। इसके बाद देश में इमरजेंसी लगी। साल 1977 के चुनाव में चौधरी चरण सिंह बागपत से मैदान में उतरे और यहीं से पहली बार लोकसभा पहुंचे।
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जयंत चौधरी मथुरा से सांसद बने और विधायक भी

बागपत। रालोद के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी मथुरा लोकसभा सीट से साल 2009 में सांसद बने, लेकिन साल 2014 में यहीं से वह हार गए। साल 2012 के चुनाव में वह मांट से विधायक भी बनें, उन्होंने त्यागपत्र दे दिया। क्योंकि तब वह मथुरा से सांसद भी थे।

चारु के चुनाव पर अभी नहीं खोले जाएंगे पत्ते

बागपत। किसान मसीहा चौधरी चरण सिंह ने अपनी पत्नी स्वर्गीय गायत्री देवी को साल 1980 में कैराना से चुनाव जिताकर लोकसभा भेजा। चौधरी अजित सिंह ने अपनी पत्नी को हमेशा सियासत से दूर ही रखा। पिछले दो चुनाव में जयंत चौधरी की पत्नी चारू स्टार प्रचारक रह चुकी हैं। सवाल है कि क्या चारू राजनीति में उतरेंगी। इस पर जयंत चौधरी कहते रहे हैं कि यह तो चारू की ही मर्जी है, उसका अपना कॅरियर है, लेकिन हकीकत यह है कि गठबंधन का फार्मूला तय हो जाने के बाद ही चारु के चुनाव को लेकर पत्ते खोले जाएंगे। बहुत संभव है कि चारु को मथुरा से मैदान में उतार दिया जाए।
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