नासूर बनी डेरियां, हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
मेरठ। हाईकोर्ट ने शहर की डेरियों पर सख्त रुख अपनाया है। मेरठ सहित पूरे प्रदेश के शहरों को मुद्दा बनाकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने शासन से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। उधर, नासूर बनी डेरियों पर आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने भी प्रशासन, नगर निगम और एमडीए से लिखित में कारण पूछा है कि आखिर इस समस्या से निजात क्यों नही मिल पा रही रही है।
शहर में डेरियों के कारण हाल बुरा है। सारा दिन गोबर नालियों में बहता है। नालों में गोबर जाने से वे भी बंद हो गए हैं। लोगों का आरोप है कि डेरी संचालकों से यदि इसका विरोध जताया जाए तो वे मारपीट पर उतारू हो जाते हैं क्योंकि उन्हें सरकारी मशीनरी का सपोर्ट है। गत दिवस भी उत्तम नगर के लोगों ने महापौर आवास से लेकर कमिश्नरी तक पर प्रदर्शन किया। ऐसे तमाम मामले हैं। लेकिन कार्रवाई सिफर है।
कहां गई कैटल कॉलोनी
मेरठ निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने मेरठ सहित पूरे उत्तर प्रदेश के शहरों में डेयरी संचालन को लेकर हाईकोर्ट में रिट दायर की थी। जिसमें कहा गया था कि इन डेरियों के कारण नाले और नाली चोक होते हैं और गोबर के कारण प्रदूषण अलग से फैल रहा है। इसके अलावा जब इन डेरियों की भैंस झुंड में निकलती हैं तो दुघर्टनाएं भी होती हैं। हादसों से संबंधित समाचार पत्रों में प्रकाशित कई मामलों को साक्ष्य के रूप में कोर्ट में पेश किया गया था। इसके साथ ही मेरठ को विशेष रूप से शामिल करते हुए कहा गया था कि महायोजना 2021 बनाते समय शहर के बाहर कैटल कॉलोनी विकसित करने की बात कही गई थी। जिसमें इन डेरियों को शिफ्ट किया जाना था। लेकिन आज तक नहीं हुई। जबकि डेरी संचालक जगह मिलने पर स्वयं ही बाहर जाने को तैयार हैं। रिट में मेरठ महानगर में 811 डेरियों की लिस्ट भी सौंपी थी। इस मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दो दिन पूर्व शासन से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। हाईकोर्ट द्वारा उत्तर प्रदेश शासन के गृह सचिव से मामले में जवाब मांगने पर प्रशासन में हड़कंप मच गया है। क्योंकि मेरठ प्रशासन अभी तक सिर्फ निगम द्वारा डेरियों पर जुर्माना लगाने से अलावा कोई भी कार्रवाई नहीं करा पाया है। ऐसे में अब इस मामले में जवाब दाखिल करने की कवायद शुरू हो गई है।
आयुक्त ने लिखा पत्र
इस बाबत आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने भी संबंधित विभागों को पत्र लिखकर पूछा है कि आखिर इस प्रकरण में क्या हुआ। यदि इस प्रस्ताव पर अड़चन है तो उसे दूर किया जाए।
खास बातें:
- जनहित याचिका पर शासन से चार सप्ताह में जवाब तलब
- लोग लगातार कर रहे शिकायत पर शहर से बाहर नहीं गई डेरियां
- केवल सूरजकुंड नाले की पटरी पर हुआ काम
- कमिश्नर ने निगम और एमडीए से मांगा जवाब