महाभारत सर्किट और मेरठ से जुड़े 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महत्व को कैसे उभारा जाए। देश और दुनिया को लोगों को इससे कैसे रूबरू कराया जाए। इनको लेकर बृहस्पतिवार को चैंबर ऑफ कॉमर्स में कार्यशाला हुई। इसमें मंथन के बाद विचार बना कि इसके लिए दो रूट बनाए जाएं। उन पर घूमने वालों को लाया जाए।
इंटेक (इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज) एनजीओ ने महाभारत सर्किट चिंतन और रूपरेखा विषय पर कार्यशाला की। इसमें मुख्य अतिथि एनजीओ के चेयरमैन मेजर जनरल एलके गुप्ता और विशिष्ट अतिथि अपर आयुक्त राधेश्याम मिश्रा रहे। कार्यशाला में महाभारत सर्किट की महत्ता पर चर्चा हुई। इसमें हस्तिनापुर से लेकर बरनावा तक का एरिया आता है। सर्किट से संबंधित इमारतों और स्थानों को विकसित करने पर जोर दिया। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम और महाभारत सर्किट को लेकर तय हुआ कि लोगों को इन दोनों के बारे में जानकारी देने के लिए दो रूट तय होने चाहिए। दिल्ली और आसपास तथा विदेश से आने वाले लोगों को इन रूट पर ले जाया जाए। महाभारत सर्किट और 1857 से जुड़ी क्रांति की जानकारी दी जाए। कार्यशाला में पूर्व आयुक्त आरके भटनागर, इतिहासकार प्रो. केडी शर्मा, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अमित, सीसीएसयू के इतिहास विभाग की हेड प्रोफेसर आराधना, मेरठ कॉलेज इतिहास विभाग के शिक्षक डॉ. विघ्नेश त्यागी, डॉ. केके शर्मा, लखन तोमर मौजूद रहे। इस दौरान छात्रों के बीच माई सिटी माई हेरिटेज नाम से प्रश्नोत्तरी कराई गई। पहला स्थान आरजी इंटर कॉलेज की छात्रा फिजा और अर्चना सिंह को मिला। इंटेक के चेयरमैन ने मेरठ चैप्टर को सर्वश्रष्ठ चैप्टर घोषित किया।
मुख्य बातें
चैंबर ऑफ कॉमर्स में आयोजित कार्यशाला में मेरठ और आसपास के ऐतिहासिक महत्व को उभारने पर चर्चा