जिला पंचायत अध्यक्ष उपचुनाव: क्रास वोटिंग से बिगड़ सकता है शह और मात का खेल
- नौ गुर्जर, पांच जाट, पांच मुस्लिम, चार ठाकुर, प्रजापति, गिरि, पंजाबी, बाकी 8 एससी
- वार्ड 07, 13, , 24 व 25 हैं ठाकुर
- वार्ड 03, 05, 10, 13, 21, 23, 29 पर हैं एससी कैटगरी के जिला पंचायत सदस्य
- वार्ड 19, 22, 27, 31, 34 पर हैं मुस्लिम सदस्य
- साम, दाम, दंड, भेद सभी नीति अपनाने पर जोर
- सारे विधायकों के अपने अपने समीकरण, अगले विधानसभा चुनाव का भी देख रहे समीकरण
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। जिला पंचायत की चुनावी रण में उतरे सूरमा भले ही किसी सदस्य को अपना मानकर चल रहे हो पर ऐन मौके पर मारी गई पलटी और क्रास वोटिंग किसी का भी खेल बना और बिगाड़ सकती है। हालांकि इससे पहले ही उम्मीदवारों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है। जातिगत आधार के अलावा साम, दाम, दंड, भेद सभी नीतियों को अपनाकर किसी भी सूरत में चुनावी रण जीतने की मशक्क्त पूरी तरह से हावी हो चली है। बृहस्पतिवार को भी जहां सारा दिन यही खेल चलता रहा तो वहीं अंतिम समय तक पूरी जोर आजमाइश होना तय है।
जिला पंचायत अध्यक्ष उपचुनाव को लेकर घमासान जारी है। खासकर भाजपाई एक-दूसरे को मनाने में जुटे हैं, ताकि प्रतिष्ठा को बचाया जा सके। 19 अगस्त को नामांकन वापसी है, इससे पहले पूरे जोर लगाए जा रहे हैं। बृहस्पतिवार को भी दिन भर यही गोटियां बिछाई जाती रही। एक एक वोट को लेकर ऐसी मारामारी है कि गोपनीय मुलाकात हो रही है। बृहस्पतिवार को भी बसपा से एमएलसी रहे एक भाजपाई की भाजपा के ही एक विधायक से गोपनीय मुलाकात हुई। पूर्व एमएलसी की बिरादरी का एक वोट उनके पास है। ऐसे में समर्थन का दौरा चला। उधर बसपा के ही एक पूर्व विधायक के पास भी एक वोट है जो इस खेमे के विपक्ष की तरफ ट्रांसफर की गई है। उधर, जिला पंचायत सदस्यों में सबसे ज्यादा नौ गुर्जरों की संख्या होने के कारण उन पर सबसे ज्यादा फोकस है। इसके अलावा एक और महिला सदस्य की वोट है जो है तो एससी कैटगरी में पर गुर्जरों के संपर्क में है और यह धड़ा उसे भी अपना ही मानकर चल रहा है।
इसके अलावा पांच जाट, चार ठाकुर, कुल सात एससी और पांच मुस्लिम सदस्यों को लेकर चुनावों की पूरी रणनीति तय की गई है। दरअसल इस चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती खुद बसपा के ही सामने है। दो विधायक तो लंबी खींचतान होते देखकर तटस्थ हो गए हैं। भाजपा का एक बड़ा धड़ा जहां कुलविंदर सिंह के पक्ष में खड़ा है, तो विधायक संगीत सोम का नाम सपना हुड्डा के पक्ष में खुलकर सामने आ चुका है। जिला पंचायत अध्यक्ष उपचुनाव से भाजपा नेतृत्व किनारा कर चुका है, लेकिन स्थानीय स्तर की राजनीति चरम पर है। हालांकि यह तस्वीर शनिवार को पूरी तरह साफ होगी, क्योंकि भाजपाई अब इस चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर दबाव की रणनीति पर उतर आए हैं। दरअसल, शनिवार 19 अगस्त को नामांकन वापसी का दिन है और 22 अगस्त को मतदान होना है। ऐसे में भाजपाई खेेमे का प्रयास है कि दबाव की रणनीति अपनाकर सपना हुड्डा का नामांकन वापस करा दिया जाए। इसके लिए भाजपाई खेमे ने आला नेतृत्व के साथ ही संघ परिवार से भी संपर्क साध रहा है। वहीं, दूसरे खेमे का कहना है कि अब पर्चा वापसी मुश्किल है। सपना हुड्डा गुट चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक चुका है।