मेरठ। सीसीएसयू के पत्रकारिता विभाग में बुधवार को स्वतंत्रता सेनानी अरविंद घोष की याद में गोष्ठी हुई।
मुख्य वक्ता चिंतक अजय मित्तल ने कहा कि अरविंद घोष स्वतंत्रता सेनानी के साथ ही कुशल राष्ट्रवादी पत्रकार भी थे। राष्ट्रवाद की भावना के कारण ही उन्होंने आईसीएस की प्रतिष्ठित सेवा छोड़ दी। वंदेमातरम और युगांतर जैसे समाचार पत्रों के माध्यम से राष्ट्रवाद की भावना को प्रबल किया। उस वक्त स्वदेशी को हथियार के रूप में प्रयोग करने का महत्व समझाते हुए शांतिपूर्ण असहयोग और मौन को भी लोगों के बीच स्थापित करने का प्रयास किया।
बंगाल विभाजन के समय पत्रकारिता के माध्यम से शांतिपूर्ण प्रतिरोध करते हुए सात लेख लिखे। जिन्होंने जनमानस को प्रभावित किया। अजय मित्तल ने कहा अरविंद घोष की दूरदृष्टि इतनी स्पष्ट थी कि 1929 में कह दिया था कि अब वैश्विक परिस्थिति ऐसी बनेगी कि भारत को स्वाधीन होने से कोई रोक नहीं सकता। विभाग समन्वयक डॉ. मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि घोष ने कहा था कि स्वयंसेवा और शांतिपूर्ण प्रतिरोध दो तरीके हैं। शांतिपूर्ण प्रतिरोध नीति सहयोग की भावना का विरोध करती है। अध्यक्षता आनंद प्रकाश अग्रवाल, संचालन छात्रा तान्या गर्ग ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रशांत कुमार ने किया। इस मौके पर डॉ. धर्मेंद्र, सुरेंद्र सिंह, सुमंत, अनिल गुप्ता, दीपिका वर्मा मौजूद रहे।