16 दिसंबर 1971 को भारत-पाकिस्तान युद्ध में 95 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया था। 13 दिन तक चले इस युद्ध में मेरठ के 19 वीरों ने भी शहादत दी थी। इस युद्ध में 21 साल के 17 पूना हॉर्स रेजीमेंट के सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल ने वीरता और साहस का ऐसा अद्भुत परिचय दिया कि पाकिस्तानी सेना के पैर उखड़ गए थे। सेना हर साल 1971 के वीरों को श्रद्धांजलि देती है।
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भारत-पाकिस्तान 1971 युद्ध विशेष
15 अगस्त 1947 के बाद देश में सबसे बड़ा युद्ध 1962 में हुआ। इसमें मेरठ के 12 जवानों-अफसरों ने शहादत दी थी। इसके बाद 1965 के भारत-पाक युद्ध में 19 जवान-अफसर शहीद हुए। 1971 के युद्ध में 19 वीर शहीद हुए। सन 1986 से 1996 तक ऑपरेशन पवन, मेघदूत और ऑपरेशन रक्षक में 13 से ज्यादा वीरों ने शहादत दी। 1999 के कारगिल युद्ध में छह परिवारों ने अपने लाल देश के लिए कुर्बान कर दिए। इसके बाद से लगातर जम्मू-कश्मीर में सेना द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन में मेरठ के लाल अपनी शहादत देते आ रहे हैं।
लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल को मिला था परमवीर चक्र
मेरठ। भारतीय सेना की 17 पूना हॉर्स रेजिमेंट सेना की आन बान शान है। सन 1971 के युद्ध में परमवीर चक्र विजेता 21 साल के लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल ने पराक्रम दिखाते हुए युद्ध की पूरी तस्वीर बदल दी थी। 15 दिसंबर 1971 को शकरगढ़ सेक्टर, पंजाब में 17 पूना हॉर्स को फारवर्ड मार्च से जरूरी आदेश मिले।
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कमांडर हनूत सिंह
कर्नल हनूत सिंह उर्फ हंटी अपने अफसरों-जवानों और टैंकों के बेड़े के साथ निकल पड़े। उनके साथ 21 साल के सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल भी थे। 16 दिसंबर को पाकिस्तान ने शकरगढ़ में लैंड माइंस बिछा रखी थी। कर्नल हंटी ने अरुण और दूसरे अफसर को अपने टैंक लेकर नदी पार करते हुए दुश्मन के इलाके जरपाल में घुसने का आदेश दिया। भारतीयों ने पाकिस्तानी सैनिकों को पीछे खदेड़ दिया और उनके टैंक ध्वस्त कर दिए। इस दौरान अरुण के साथी अफसर शहीद हो गए।
अरुण खेत्रपाल अकेले रह गए। सामने से 14 पाकिस्तानी टैंकों की स्कवाड्रन तैयार थी। दुश्मन के एक टैंक का गोला उनके टैंक पर गिरने से उसमें आग लग गई। अरुण ने अपनी पोजिशन कर्नल हंटी को वायरलेस के जरिये बताई तो उन्होंने अरुण को वापस आने का हुक्म दिया, लेकिन अरुण तैयार नहीं हुए। उन्होंने कहा कि सर, मेरे टैंक की गन अभी काम कर रही है। मैं दुश्मनों को गिराकर ही आऊंगा।
यह कहने के बाद उन्होंने अपने ड्राइवर नत्थू सिंह को रेडियो सेट ऑफ करने के लिए कह दिया। 21 साल के अरुण खेत्रपाल ने वीरता दिखाते हुए दो और पाकिस्तानी टैंक धराशायी कर दिए। तभी एक गोला अरुण के टैंक पर गिर गया और वे शहीद हो गए। उन्हें अदम्य साहस और नेतृत्व क्षमता के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र से नवाजा गया। वे सबसे कम उम्र के भारतीय थे, जिन्हें यह सम्मान मिला।