मेरठ। शहर की सड़कों पर शोहदों से बेटियां परेशान हैं। जनता भी शोहदों के खिलाफ आवाज उठाने लगी है। इसके बावजूद पुलिस की नींद नहीं टूट रही। हालत ये हैं कि पुलिस शोहदों पर मजबूत कार्रवाई करने की बजाए, थानों में समझौते करा रही है। शुक्रवार को दो थानों में ऐसे दो मामले देखने को मिले। इस दौरान शोहदों को बचाने के लिए दिनभर पंचायत लगी रही। शायद यही वजह कि योगी सरकार का एंटी रोमियो दस्ता शोहदों पर शिकंजा कसने में फेल साबित हो गया।
माफी मांगने पर कैसे दे दी क्लीनचिट
मोहनपुरी में बृहस्पतिवार को छह युवकों ने दो सगी बहनों से छेड़छाड़ कर उनको अगवा करने का प्रयास किया था। शुक्रवार को छात्राओं की मां ने खुद थाने पहुंचकर पुलिस के सामने मनचलों को पीटा। इतना सब होने के बाद भी पुलिस ने समझौते की पटकथा तैयार कर ली। शुक्रवार को दोनों पक्षों के लोग सिविल लाइन थाने पहुंचे। माफीनामे के बाद छात्रा के परिजनों ने समझौते पर सहमति जता दी। सवाल उठता कि पुलिस ने कैसे समझौता मंजूर कर लिया और दोनों आरोपियों को क्लीनचिट दे दी।
प्रधानाचार्या को समझाने में जुटी पुलिस
टीपीनगर के एक स्कूल में शोहदे के आतंक के मामले भी पुलिस प्रधानाचार्या को समझाने में जुटी है। पुलिस शुक्रवार को स्कूल पहुंची। पुलिस ने प्रधानाचार्या से कहा कि बेटियों की सुरक्षा करने की जिम्मेदारी हमारी है। लेकिन मुकदमा दर्ज मत कराओ। पुलिस शोहदों को कतई नहीं बख्शेगी। मजबूत कार्रवाई करेगी।
पब्लिक पकड़ती और पुलिस छोड़ती
सिविल लाइन क्षेत्र में बृहस्पतिवार को छेड़छाड़ के दो मामले हुए थे। एक मामले में गिरफ्तारी कराने के लिए थाने में हंगामा करना पड़ा। तब जाकर दो युवक पकड़े गए। वहीं, दूसरे मामले में पब्लिक ने दो युवकों को छेड़खानी के मामले में पकड़कर पीटा और पुलिस को सौंपा। पुलिस ने दोनों आरोपी अनस निवासी शाहपीर गेट कोतवाली और शाबेज निवासी किदवईनगर लिसाड़ीगेट को कोर्ट में पेश किया, जहां से उनको जेल भेजा। जबकि दूसरे मामले में पुलिस ने दो आरोपी थाने से छोड़ दिए हैं। जिस पर लोगों में पुलिस के प्रति गुस्सा है।
प्रमुख खबरें
- छेड़खानी और अगवा करने के मामले में थानों में पंचायत
- सिविल लाइन और टीपीनगर में समझौते की चली बात