मेरठ। महापौर और नगरायुक्त के बीच रार में शहर का विकास रसातल में जा रहा है। इस तकरार का नुकसान शहर की जनता को हो रहा है। न तो जनसमस्याओं का निस्तारण हो रहा है और न ही डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने और कूड़ा निस्तारण प्लांट जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर निर्णय हो रहा है। सफाई और पथ प्रकाश पटरी से उतर चुकी है। कारण है निगम कार्यकारिणी और बोर्ड बैठक बुलाने को लेकर दोनों के बीच समन्वय नहीं बन पा रहा है।
नगर निगम की कार्यकारिणी और बोर्ड बैठक प्रत्येक माह होनी चाहिए। ताकि जनहित की योजनाएं लागू हो सकें। शहर का तेजी से विकास हो सके। लेकिन कार्यकारिणी और बोर्ड की बैठकों को लेकर महापौर और नगरायुक्त एकमत नहीं दिख रहे हैं। महापौर सुनीता वर्मा ने 17 जुलाई को निगम कार्यकारिणी की बैठक बुलायी थी। जिसको नगरायुक्त मनोज कुमार ने एक दिन पहले महापौर को पत्र भेजकर सीएम की मुख्य योजनाओं पर कार्य के चलते बैठक न करने की बात कही थी। जिस पर महापौर ने टाउन हॉल पहुंचकर नगर निगम प्रशासन पर आरोप लगाया था कि जन हित में कोई काम नहीं हो रहा है। नगरायुक्त जनता के सामने आने से बच रहे हैं। जिसके बाद से महापौर और नगरायुक्त के बीच विवाद गहरा गया। अब नगरायुक्त पिछले चार दिन से महापौर को पत्र लिखकर बैठक बुलाने का आग्रह कर रहे हैं। लेकिन महापौर निगम कार्यकारिणी करने का निर्णय नहीं ले रही हैं। जिससे कई महत्वपूर्ण मामले अटके पड़े हैं।
जब चाहें बुला लें बैठक
महापौर को कार्यकारिणी बैठक बुलाने के लिए कई पत्र लिख चुके हैं। जब भी वह चाहें बैठक बुला सकती हैं। यह बात सही है कि शहर हित में कई मुद्दों पर कार्यकारिणी और बोर्ड में चर्चा होनी है। -मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त
जब समय होगा बुलाएंगे
जनता की समस्याओं को लेकर हम गंभीर हैं। इसलिए हमने बैठक बुलायी थी। जब नगरायुक्त के पास समय नहीं था। लेकिन अब जब हमें समय होगा तो कार्यकारिणी की बैठक की जाएगी। -सुनीता वर्मा, महापौर
खास बातें:
- इस तकरार में पिस रही शहर की जनता, समस्याओं का अंबार
- निगम कार्यकारिणी और बोर्ड बैठक बुलाने को नहीं कोई तैयार,