मेरठ। स्वच्छता में मेरठ का नाम एक बार फिर देश में गंदे शहरों में गिना गया। इससे जहां नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली की पोल खुली है। वहीं, स्वच्छता सर्वेक्षण टीम ने शहर की स्वच्छता के दावों की हवा निकाल दी है।
मेरठ पड़ोसी शहर गाजियाबाद के बराबर में भी खड़ा नहीं हो सका है। बुधवार को जारी स्वच्छ शहरों की सूची में दस लाख से ऊपर आबादी वाले शहरों में गाजियाबाद नंबर-1 फास्टेस्ट मूवर बिग सिटी हो गया है। मेरठ की जनता सूची में अपने शहर का नाम ढूंढती ही रह गयी। जबकि स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान निगम के अधिकारी टॉप-10 शहरों में मेरठ को शामिल कराने का दावा कर रहे थे।
भारत सरकार ने चार जनवरी से 10 मार्च तक शहर-शहर टीम भेजकर स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत स्वच्छता जांची थी। 4203 नगर निकायों का स्वच्छता सर्वेक्षण किया गया था। जिसमें 40 करोड़ शहरी नागरिक शामिल किए गए थे। सभी से शहर की स्वच्छता का फीडबैक लिया गया था। स्वच्छता एप से लेकर सिनेमा और स्कूल कालेजों में प्रचार प्रसार किया गया था। जिस पर नगर निगम खजाने से लाखों रुपये खर्च किए गए। एप पर आने वाली शिकायतों का निस्तारण निगम अधिकारियों द्वारा किया गया था। यही नहीं शहर में सर्वे करने पहुंची टीम ने पेट्रोल पंप, स्कूल कालेजों में स्वच्छता की जांच की थी।
नेशनल मीडिया सेंटर में बुधवार को आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप पुरी ने सर्वे के परिणाम घोषित किए। पिछले साल सर्वे में उत्तर प्रदेश का गाजियाबाद 434 शहरों में 351वें नंबर पर था। इस बार वह टॉप-50 शहरों में शामिल होने के साथ ही 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में देश की नंबर-1 फास्टेस्ट मूवर बिग सिटी अवार्ड के लिए चुना गया है। 3 से 10 लाख की आबादी वाले शहरों में अलीगढ़ को नवाचार और उसका श्रेष्ठ उपयोग श्रेणी में नंबर-1 शहर के तौर पर चुना गया है।
इस संबंध में जब नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुंवरसेन से बात की गयी तो उन्होंने स्वच्छता सर्वेक्षण की रिपोर्ट की जानकारी होने से ही इंकार कर दिया।