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यूनिवर्सिटी में मार्कशीट के लिए भटक रहे छात्र-छात्राएं

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सीसीएसयू में मार्कशीट के लिए भटक रहे छात्र
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी में मार्कशीट के लिए छात्र-छात्राओं को भटकना पड़ रहा है। डाक टिकट लगा लिफाफा देने के बावजूद एक माह बाद भी मार्कशीट घर नहीं पहुंच रही हैं। कितने ही छात्रों के लिफाफे में गलत मार्कशीट भेजे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ये सब बाबुओं की लापरवाही के चलते हो रहा है।
यूनिवर्सिटी कैंपस में छात्र-छात्राओं की मार्कशीट के लिए पहले छात्र समस्या निवारण केंद्र बनाया गया था। यहां पर शुरुआत में ठीक काम चला। लेकिन फिर पूरा सिस्टम ठप हो गया। अब आजकल मार्कशीट लेने के लिए छात्रों को डाकघर से लिफाफा लेकर उस पर टिकट लगाने के बाद संबंधित काउंटर से एक फार्म भरना पड़ता है। इसके बाद उस फार्म को बाबू लिफाफे से अटैच करके रख लेते हैं। छात्र को बताया जाता है कि एक माह में उसकी मार्कशीट घर पर पहुंच जाएगी।
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गाजियाबाद से आए अमित ने बताया कि उसने सवा माह पहले फार्म जमा किया था। लेकिन आज तक मार्कशीट घर नहीं पहुंची। उसने यूनिवर्सिटी में काउंटर पर इसके बारे में जानकारी मांगी तो बाबू ने साफ कह दिया कि उनके यहां से सब लिफाफे भेज दिए जाते हैं, ऐसे में वो डाकघर में कहीं अटकी होगी। वे इस बारे में कुछ नहीं बता सकते हैं। अमित ने बताया कि इसको लेकर कई अधिकारियों से मिले। लेकिन सबने हाथ खड़े कर दिए। उसने बताया कि मार्कशीट बाहर भेजनी है। लेकिन पता ही नहीं चल रहा है कि वो कहां पर है। मुजफ्फरनगर से आए कपिल को एक फार्म भरना था। जिसके लिए उसे मार्कशीट की जरूरत है। लेकिन बीस दिन बीतने के बाद भी उसके घर मार्कशीट नहीं पहुंच पाई है। रोजाना यूनिवर्सिटी में दर्जनों छात्र इसी तरह से मार्कशीट के लिए चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं है।
किसी की नौकरी लगे या नहीं, यहां कोई फर्क नहीं पड़ता
यूनिवर्सिटी में आने वाले कितने ही छात्रों को नौकरी का फार्म भरने के लिए मार्कशीट की जरूरत होती है। लेकिन ऐसी व्यवस्था है कि एक माह से पहले मार्कशीट मिलना मुमकिन नहीं है। ऐसे में सवाल ये है कि अगर किसी को नौकरी के लिए जल्द मार्कशीट चाहिए तो वो कहां जाएगा। ये भी तब है जबकि अधिकतर छात्रों की मार्कशीट यूनिवर्सिटी ने कॉलेजों में भेजी ही नहीं फिर भी उसका खामियाजा उन्हें ही भुगतना पड़ रहा है।
खेल कर रहे कुछ बाबू
कई छात्रों का आरोप है कि कुछ बाबू मार्कशीट को लेकर खेल करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। बैक डोर से कुछ लोगों को फार्म जमा करने के बाद दूसरे ही दिन काउंटर से ही गुपचुप तरीके से मार्कशीट दे दी जा रही है। जिन छात्रों की सिफारिश नहीं है, उनको भटकने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
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सख्त कदम उठाएंगे
मार्कशीट को लेकर कुछ छात्रों ने पहले भी शिकायत की है। इसको दिखवाया जा रहा है। मार्कशीट को लेकर जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही सुनिश्चित कराई जाएगी। अगर कहीं गड़बड़ी हो रही है तो यूनिवर्सिटी प्रशासन सख्त कदम उठाएगा। -प्रो. एचएस सिंह, प्रो-वाइस चांसलर


खास बातें:
एक माह से ज्यादा समय बीतने पर भी नहीं मिल रही मार्कशीट
बाबुओं पर खेल करने का आरोप, प्रो. वाइस चांसलर ने जांच कराने को कहा
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