मेरठ। शहर हित के सभी प्रपोजल लखनऊ पहुंचते तो हैं, लेकिन समय से वापस नहीं लौटते। इससे शहर का विकास और सरकारी योजनाएं प्रभावित हो रही है। केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत मिशन से जुड़ी योजनाओं पर भी उप्र सरकार में समय से मंथन नहीं हो रहा है। इसलिए कूड़ा निस्तारण प्लांट और डोर टू डोर कूड़ा उठाने के लिए संसाधनों को हरी झंडी नहीं मिल पा रही है।
एनजीटी के आदेशानुसार और स्वच्छ भारत मिशन के तहत महानगर से निकलने वाले कूड़े का निस्तारण और शहर में डोर टू डोर कूड़ा उठाने के लिए लगभग 72 करोड़ रुपये से वाहनों की खरीद का प्रस्ताव शासन में लंबित चल रहा है। बता दें कि कूड़ा निस्तारण प्लांट का भूमि पूजन गांवड़ी जंगल में किया गया था। उस समय अधिकारी, भाजपा के पूर्व महापौर हरिकांत अहलुवालिया और महाराष्ट्र की कंपनी के अधिकारियों ने छह माह के भीतर कूड़ा निस्तारण प्लांट का संचालन शुरू करने का आश्वासन दिया था। नगर निगम प्रशासन की तरफ से 800 मीट्रिक टन के कूड़ा निस्तारण प्लांट की डीपीआर शासन को भेजी गई थी। जिस पर पूरे साल विचार ही नहीं किया गया। एक माह पहले उसी डीपीआर को शासन ने 400 मीट्रिक टन कूड़े के प्लांट के लिए डीपीआर बनाने की बात कहकर वापस लौटा दिया। अब कंपनी ने फिर से निगम के माध्यम से शासन को डीपीआर भेजी है। जो अभी तक शासन से वापस नहीं लौटी है।
शासन स्तर पर हो रही डीपीआर तैयार
महानगर से डोर टू डोर कूड़ा उठाने की लगभग 72 करोड़ की योजना है। जिसकी डीपीआर भी शासन स्तर पर ही तैयार की जा रही है। इसको भी दो माह से अधिक समय बीत चुका है। लेकिन अभी तक न तो डीपीआर मेरठ पहुंची है और न ही कोई संदेश आया है। शासन स्तर पर धीमी कार्यवाही को लेकर निगम का कोई अधिकारी भी बोलने को तैयार नहीं है।
निगम अधिकारियों को दिल्ली में लगी फटकार
कूड़ा निस्तारण योजना में लापरवाही पर एनजीटी ने भी निगम अधिकारियों को फटकार लगाई हैं। एनजीटी ने सेंट्रल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के माध्यम से मेरठ नगर निगम में कूड़ा निस्तारण प्लांट की स्थिति की रिपोर्ट मांगी। जिस पर मंगलवार को नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान और अधिशासी अभियंता मोइनुद्दीन ने दिल्ली पहुंचकर सेंट्रल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सामने कूड़ा निस्तारण योजना से संबंधित अपना पक्ष रखा।
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वर्जन.....
धरातल पर दिखेंगी योजनाएं
कूड़ा निस्तारण प्लांट की डीपीआर शासन में है। जिस पर परीक्षण चल रहा है। साथ ही डोर टू डोर कूड़ा उठाने के लिए 72 करोड़ रुपये से संसाधनों के लिए डीपीआर बन रही है। इसी सप्ताह शासन का आदेश आने वाला है। शीघ्र ही योजनाएं धरातल पर दिखाई देंगी। -मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त।