फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सात अवैध लैब के खिलाफ हुई एफआईआर

विज्ञापन
विज्ञापन
सात अवैध लैब के खिलाफ हुई एफआईआर
विज्ञापन

उपमुख्य चिकित्साधिकारी प्रशासन ने चार थानों में कराई रिपोर्ट
मेरठ। शहर में बिना पंजीकरण चल रही सात पैथोलॉजी लैब के खिलाफ बृहस्पतिवार को एफआईआर दर्ज कराने के लिए थानों में तहरीर दी गई है। इनमें एक-एक लैब टीपीनगर, लिसाड़ी गेट और नौचंदी थाना क्षेत्र, चार पैथोलॉजी लैब मेडिकल थाना क्षेत्र में संचालित हैं।
उपमुख्य चिकित्साधिकारी प्रशासन और अपंजीकृत चिकित्सकोें के नोडल अधिकारी डॉ. गोपाल सिंह ने थानों में तहरीर दी है। इन पैथोलॉजी लैब में नौचंदी थाना क्षेत्र में शुभकामना पैथोलॉजी लैब जो कि शुभकामना अस्पताल आरटीओ ऑफिस के पास है, उसके खिलाफ तहरीर दी गई है। जबकि लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र में श्रीराम पैथोलॉजी लैब जो कि प्रहलादनगर सविता अस्पताल के सामने संचालित है और टीपीनगर थाना क्षेत्र में रोहटा रोड पर संचालित एसएसआर पैथोलॉजी के खिलाफ तहरीर दी है। वहीं मेडिकल थाना क्षेत्र में दृष्टि पैथोलॉजी लैब, शास्त्री कुंज, निकट राधा गोविंद इंजीनियरिंग कॉलेज गढ़ रोड, माइक्रो केयर पैथोलॉजी लैब 723/6 मंसा देवी रोड, जागृति विहार, शिव पैथोलॉजी लैब एएलआरएम मेडिकल कालेज के सामने, परफैक्ट पैथोलॉजी लैब प्रेम अस्पताल के पास पीवीएस मॉल शास्त्रीनगर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पंजीकरण निरस्त होने के बाद भी चल रही थीं लैब
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जिन सात पैथोलॉजी के खिलाफ बृहस्पतिवार को एफआईआर दर्ज कराई गई है उनमें तीन ऐसी हैं जिन पर पहले भी विभाग कार्रवाई कर पंजीकरण निरस्त कर चुका। इनमें मेडिकल थाना क्षेत्र में दृष्टि पैथोलॉजी लैब, शास्त्री कुंज, निकट राधा गोविंद इंजीनियरिंग कालेज गढ़ रोड, माइक्रो केयर पैथोलॉजी लैब 723/6 मंसा देवी रोड और टीपीनगर थाना क्षेत्र में रोहटा रोड पर संचालित एसएसआर पैथोलॉजी लैब हैं, जिन पर एमडी पैथोलॉजिस्ट न होने के कारण 14 मई 2018 को स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए इनका पंजीकरण निरस्त कर दिया था। उस दौरान विभाग ने लैब के दोबारा चलते मिलने पर एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी भी दी थी, लेकिन पंजीकरण निरस्त होने के बाद भी लैब चल रही थीं। इन लैब पर लगातार मरीज भी अपनी जांच कराने आ रहे थे, लेकिन विशेषज्ञ न होने पर उन्हें न तो सही जांच रिपोर्ट मिली होगी और न ही जांच रिपोर्ट के आधार पर सही इलाज।
सील करने का काम पुलिस का
लैब को सील करने का काम पुलिस का है। स्वास्थ्य विभाग एफआईआर कराता है। हो सकता है, पुलिस ने इनको बंद न कराया हो। - डा राजकुमार, सीएमओ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें