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पूर्व नगर आयुक्त के पत्र पर कार्रवाई करते तो नहीं बिगड़ता मामला

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पूर्व नगर आयुक्त के पत्र पर कार्रवाई होती तो नहीं बिगड़ता मामला
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। मेनका सिनेमा मामले में अब एक नया खुलासा हुआ है। जो पूरी तरह प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर रहा है। 2011 में पूर्व नगर आयुक्त डीके सिंह ने डीएम ऑफिस में शिकायत की थी, जिसमें मेनका सहित खसरा नंबर 542 का पूरा खुलासा करते हुए बताया था कि ये जमीन सरकारी है। जिस पर कुछ भूमाफिया कब्जा कर रहे हैं। इसलिए इस पर कार्रवाई करते हुए इसे बचाया जाए। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर एक दो बार पत्राचार के बाद फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
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इस शिकायत पर पूर्व अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व आभा गुप्ता ने नगर आयुक्त को पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने इस जमीन की जांच किसी सक्षम अधिकारी से कराने को कहा था। तत्कालीन नगर आयुक्त डीके सिंह ने 5 मार्च 2011 को जिलाधिकारी को पत्र लिखा था। जिसमें उन्होंने खसरा नंबर 542 का पूरा ब्योरा दिया था। जिसमें बताया था कि यह जमीन सरकारी है और इसका पूरा क्षेत्रफल 14710 वर्ग मीटर है। उन्होंने पत्र में बताया था कि इस जमीन के कितने हिस्से में एसपी सिटी ऑफिस, पुलिस चौकी, अलकरीम होटल, मेनका सिनेमा आदि हैं। उन्होंने पत्र में नासिर इलाही और फिरोज इलाही पर कब्जा करने की भी बात कही थी और जिला प्रशासन से इस मामले में कार्रवाई करते हुए जमीन को कब्जा मुक्त कराने को कहा था। लेकिन इस पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यदि इस पत्र पर तभी कार्रवाई तय हो जाती तो आज जो मेनका सिनेमा को लेकर बवाल मचा है, नहीं मचता। वहीं अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व आनंद कुमार का कहना है कि मेनका मामले में पुरानी पत्रावली के कुछ अभिलेख मिले हैं। इन सभी को लेकर जांच करते हुए रिपोर्ट तैयार हो रही है।
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