किसान की फसल खेत में, एमएसपी की वसूली शुरू
मेरठ। किसान की दलहनी फसलें भले ही अभी खेत से बाहर न आई हाें, लेकिन व्यापारियों ने सरकार के निर्णय को भुनाना शुरू कर दिया है। सरकार ने किसान को उसकी फसल का अच्छा दाम दिलाने के लिए एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) बढ़ाने का निर्णय लिया है। किसान को भले ही अभी लाभ मिलने में काफी समय हो, लेकिन व्यापारियों ने एमएसपी के बहाने से पुरानी दालों के दाम बढ़ा दिए हैं। जिसका सीधा असर जनता की जेब पर पड़ रहा है।
चावल और सभी दालें महंगाई की आग में जलने लगी हैं। इस पर न तो शासन गंभीर है और न ही प्रशासनिक अधिकारी। सरकार ने 2018-19 की दलहनी फसलों पर एमएसपी बढ़ाया था। ताकि किसान को फसल की लागत के अनुपात में कुछ लाभ मिल सके। वहीं दलहनी कारोबार से जुड़े व्यापारियों ने किसान की फसल बाजार में आने से पहले ही जनता को एमएसपी बढ़ाए जाने का हवाला देते हुए दालों के दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। दस दिन के भीतर अधिकतर थोक में दालों के दाम 300 से लेकर 700 प्रति क्विंटल बढ़े हैं।
सरकार द्वारा बढ़ाया गया एमएसपी
दाल पूर्व के रेट एमएसपी बढ़ने पर रेट
अरहर दाल 5450 5675
मूंग दाल 5575 6975
उड़द दाल 5400 5600
व्यापारियों द्वारा बढ़ाए गए दाम
दाल दस दिन पहले रेट अब
दाल चना 4100 4800
दाल उड़द 3900 से 7100 4200-7500
दाल मसूर 5100 5800 से 6000
दाल मूंग 5800 6100
दाल अरहर 5000 5300
(ये थोक भाव (प्रति क्विंटल) नवीन गल्ला मंडी से लिए गए हैं)
जैसा माल पीछे से आ रहा है वैसा ही मंडी के व्यापारी बेच रहे हैं। थोक में दाल के व्यापारी आधा से एक प्रतिशत मुनाफे पर कारोबार करते हैं। दस दिन के भीतर दालों के रेट बढ़े हैं। यह बात भी सही है कि जब किसान की दलहनी फसलें बाजार में पहुंचेगी तो दालों के दाम और बढ़ेंगे। मनोज गुप्ता, अध्यक्ष, गल्ला मंडी व्यापार संघ, नवीन मंडी