मेरठ। ‘मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।’ हाई जंप की खिलाड़ी ख्याति माथुर पर ये पंक्तियां सटीक बैठती हैं। सुविधाआें का अभाव और बिना कोच के कैसे आसमान पर सितारे की मानिंद चमका जाता है यह कोई ख्याति से सीखे। मेरठ की इस बेटी ने सारे कयासों को पीछे छोड़ते हुए 33वीं जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर क्रांतिधरा का नाम रोशन कर दिया।
रुड़की रोड राजन कुंज निवासी विशाल माथुर का बेगमब्रिज पर माथुर फोटो स्टूडियो है। चौथी कक्षा में नन्ही ख्याति जब स्कूल के खेलकूद में अव्वल आयी तो पिता विशाल माथुर को उसमें बेहतर भविष्य की संभावनाएं नजर आईं। वह उसे कैलाश प्रकाश स्टेडियम ले आये जहां उसका शुरुआती प्रशिक्षण शुरू हो गया। ख्याति जिला स्तर पर आगे बढ़ गई और असली कहानी तब शुरू हुई जब ख्याति ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीत लिया। खुशी के साथ विषय चिंता का भी था क्योंकि इससे आगे का सफर तय करने के लिए कोई स्पेशलिस्ट कोच नहीं था। हाई जंप में प्रयोग होने वाले मेट तक यहां नहीं थे। जो मेट था वह जगह जगह से फटा हुआ है।
स्कूल तक छोड़ना पड़ा
विशाल बताते हैं कि ख्याति को खेल के लिये दीवान पब्लिक स्कूल छोड़ना पड़ा। खेल की वजह से स्कूल की मानक उपस्थिति कम थी। ऐसे में स्कूल से नाम कट गया। बावजूद इसके ख्याति और उसके पिता ने हार नहीं मानी। हालांकि उन्होंने खेल मंत्री चेतन चौहान से भी अपना दर्द साझा किया, लेकिन नतीजा शूून्य ही रहा।
दिखा दिया दम
16 नवंबर 2017 से विजयवाड़ा में आयोजित 33वीं जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में ख्याति उतरी तो उसके दिमाग में एक ही लक्ष्य था, वह था गोल्ड जीतना। उसने लक्ष्य पूरा किया और सोने का तमगा हासिल किया। इससे पहले वह सीनियर खिलाड़ियों के टिप्स और खुद की लगन से 2016 कोयंबटूर में आयोजित जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत चुकी थी वह भी नेशनल रिकार्ड ब्रेक करके। ख्याति का एक ही सपना है, ओलंपिक में देश का नाम रोशन करना। पिता विशाल कहते हैं कि यदि बेटी के कॅरियर के लिये शहर, राज्य यहां तक कि काम भी छोड़ना पड़ा तो छोड़ देंगे।
मां की मेहनत को सलाम
मां रचना माथुर के साथ ने बेटी को एक शानदार खिलाड़ी बना दिया है। मां को चैंपियनशिप के लिये बेटी के साथ जाना पड़ता है और पांच से दस दिन तक होटल में रुकना पड़ता है। लेकिन बेटी की उपलब्धि के आगे सारी परेशानी छोटी पड़ जाती हैं। बेटी के लिये उन्होंने डाइट चार्ट खुद ही बनाया है। इसमें बादाम, काजू, केला, दूध, अंडा और चिकन शामिल है।
नया कोच देंगे
बीमार होने की वजह से छुट्टी पर चल रहे आरएसओ आले हैदर ने फोन पर बताया कि तकनीक एक बार स्टेबल हो जाये तो बस अभ्यास की जरूरत होती है। यहां पिछले वर्ष कोच गौरव की तैनाती हुई, लेकिन पारिवारिक वजह से वो यहां टिक नही पाये। अप्रैल 2018 में नये कोच के लिये प्रयास करेंगे।
ख्याति की उपलब्धियां
2014 में गुजरात में आयोजित हुई सीबीएसई नेशनल में ब्रांज मेडल जीता।
2015 में विशाखापट्टनम में आयोजित नेशनल एथलीट में गोल्ड मेडल झटका।
2016 में लखनऊ में आयोजित स्टेट एथलेटिक चैंपियनशिप में हाई और लांग जंप में गोल्ड पर कब्जा जमाया।
2017 में जूनियर नेशनल एथलीट चैंपियनशिप में हाई जंप में गोल्ड मेडल अपने नाम किया।