अमर उजाला के स्टिंग ऑपरेशन में हुआ था पूरे मामले का खुलासा
जांच समिति की तरफ से छह मई को स्पष्टीकरण के लिए दिया नोटिस
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में डिग्री और मार्कशीट बनाने में घूस लेने के आरोपों में सस्पेंड किए गए दोनों कर्मचारियों को जांच समिति के सदस्यों ने नोटिस जारी किया है। समिति सदस्यों ने दोनों को छह मई को अपना स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया है। इसके साथ ही गोपनीय विभाग के अन्य कर्मचारियों ने अब तक पुराने रिकॉर्ड का ब्योरा जांच समिति को नहीं सौंपा है। ऐसे में उनको भी नोटिस जारी किया जा सकता है।
अमर उजाला ने 26 मार्च के संस्करण में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में फैले भ्रष्टाचार को उजागर किया था। स्टिंग ऑपरेशन से स्पष्ट हुआ था कि यूनिवर्सिटी में कर्मचारी दलालों के माध्यम से छह सौ रुपये से 15 सौ रुपये तक में रोजाना मार्कशीट और डिग्री दे रहे थे। जो छात्र घूस नहीं दे रहे थे वो महीने चक्कर काटने को मजबूर थे। पूरे प्रकरण का खुलासा होने पर कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने सख्त कार्रवाई करते हुए डिग्री और प्रोविजनल सर्टिफिकेट के सारे रिकॉर्ड तलब करा लिए थे। जांच पड़ताल में सामने आया था कि रोजाना 30 से 40 डिग्री और प्रोविजनल प्रमाण पत्र घूस लेकर बनाए जा रहे थे। 25 मार्च को गाजियाबाद से आए बीडीएस के छात्र-छात्राओं को भी 13 प्रोविजनल प्रमाण पत्र नौ हजार रुपये घूस लेकर दिए गए थे।
प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर कुलपति ने तत्काल रूप से छात्र समस्या निवारण केंद्र पर तैनात दो कर्मचारियों जॉनी शर्मा और कपिल कुमार को सस्पेंड कर दिया था। एक संविदा कर्मचारी अनंत कपिल को निवारण केंद्र से हटाते हुए उसके खिलाफ जांच बैठा दी थी। इसके साथ ही पैसे लेकर डिग्री बनवाने में सहयोेग करने और रोजाना आने वाले फार्मों पर भी डिग्री देने की लापरवाही करने वाले 10 अफसरों-कर्मचारियों पर पर जांच के लिए कमेटी बनाई गई थी। पूरे मामले में जांच कमेटी के सदस्य चीफ प्रॉक्टर प्रो. बीरपाल सिंह और सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज की डायरेक्टर प्रो. जयमाला ने दोनों कर्मचारियों को नोटिस जारी कर इस मामले में छह मई को अपना स्पष्टीकरण देने को कहा है। चीफ प्रॉक्टर बीरपाल सिंह ने बताया कि स्पष्टीकरण के बाद समिति अपनी रिपोर्ट कुलपति को सौपेंगी।
पुराना रिकॉर्ड नहीं देने पर हो सकता है नोटिस जारी
इस पूरे प्रकरण में समिति के सदस्यों ने गोपनीय विभाग के कर्मचारियों से यह रिकॉर्ड मांगा था कि आखिर रोजाना आने वाले आवेदनों पर इतने प्रमाण पत्र कैसे बनाए जा रहे थे। इसको लेकर पूरा रिकॉर्ड मांगा गया था। यह रिकॉर्ड अभी तक नहीं दिया गया है। इस पर भी इन कर्मचारियों को नोटिस जारी किया जा सकता है।