गौवंशों का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता समझें अधिकारी: आयुक्त
आयुक्त ने की मंडल के गौवंश आश्रय स्थलों के संचालन व स्थापना की समीक्षा
मेरठ। आयुक्त अनीता सी मेश्राम ने कहा कि निराश्रित गौवंशों को चारा, पानी, चिकित्सा की सुविधाओं के साथ आश्रय स्थलों में संरक्षण प्रदान करना अधिकारी अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता समझे। इस काम में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। उन्होंने कहा कि गौवंश आश्रय स्थलों की देखरेख हेतु प्रभारी नियुक्त किया जाए तथा आश्रय स्थलों का समय समय पर निरीक्षण कर वहां की सफाई व्यवस्था का भी पूर्ण ध्यान रखा जाए। उन्होंने मंडल के मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों एवं जिला प्रशासन द्वारा कराए गए सर्वे के आंकड़ो में भिन्नता पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की तथा निर्देश दिए वह आपसी समन्वय के साथ आंकड़े तैयार करें।
आयुक्त सभागार में गौवंश आश्रय स्थलों के संचालन स्थिति तथा गौवंशों के संरक्षण की स्थिति पर मंडलायुक्त अनीता सी मेश्राम ने समीक्षा की। बैठक में नगरीय एवं ग्रामीण स्तर पर किए गए सर्वे कार्य के सापेक्ष संरक्षित किये गए गौवंशों की स्थिति का आंकलन करते हुए आयुक्त ने पाया कि बुलंदशहर को छोड़कर जिला प्रशासन एवं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, हापुड़ के आंकड़ों में भिन्नता है। जिस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए आपसी समन्वय स्थापित कर सही आंकड़े अगली बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिये। समीक्षा में आयुक्त ने पाया कि गौवंशों को आवारा छोड़ने वाले पशु पालकों पर जनपद मेरठ में 60 हजार रूपये का दंड लगाया गया है। आयुक्त ने मंडल में 1.20 करोड़ की लागत से बनने वाली गोशालाओं के निर्माण हेतु टेंडर आदि प्रक्रिया शीघ्र कराने के निर्देश दिए।
बैठक में संयुक्त विकास आयुक्त रामरक्ष पाल यादव, अपर निदेशक पशुपालन डा एके सिंह, डीएफ ओ अदिति शर्मा, नगर आयुक्त मेरठ मनोज चौहान, अपर जिलाधिकारी प्रशासन मेरठ रामचंद्र सहित सभी जनपदों के अधिकारी मौजूद रहे।