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मां तुझे प्रणाम कवि सम्मेलन व मुशायरा

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मेरठ। अमर उजाला के अभिनव अभियान ‘मां तुझे प्रणाम’ के 10 वें आयोजन में सोमवार की शाम बेहद खास रही। भैसाली मैदान में कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन हुआ। देश के नामचीन कवियों व शायरों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया। देशभक्ति की धारा जब कविताओं और शायरी के माध्यम से बही तो जन-जन मां तुझे प्रणाम के रंग में रंग गया। देशभक्ति का उफान कविता से फूटा तो शायरी भी अपने अदब में अव्वल रही। आजादी के 71 वें स्वतंत्रता दिवस से पहले कविता व शायरी का संगम विहंगम बन गया। शहर के हर वर्ग ने कविताओं व शायरी का लुत्फ लिया।
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कवि सम्मेलन की शुरूआत मशहूर शायरा शबीना अदीब द्वारा पेश की गई सरस्वती वंदना से हुई। विख्यात कवि पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा ने देर रात माइक संभाला तो कवि सम्मेलन एवं मुशायरा पूरी रंगत में आ गया। उन्होंने अपने ही अंदाज में हास्य से शुरुआत की और बाद में संजीदा कविताओं से सामाजिक सरोकार और जिम्मेदारियों का संदेश दिया। उन्होंने राजनीति पर तंज कसा। कहा कि देश कांग्रेस मुक्त हो जाएगा और भाजपा कांग्रेस युक्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि राममंदिर बने यह राजा का काम नहीं, राजा का काम है कि पूरा देश मंदिर जैसा बने। कहा कि राजा का काम नहीं कि वह दलितों के घर भोजन करे। राजा का काम है कि हर दलित उसकी तरह भोजन करे। उन्होंने देश के बाहर काम करने जा रहे युवाओं को सीख दी। कहा कि मेरा सुख इसमें नहीं कि बेटा अमेरिका में रहकर पांच लाख महीना कमाए, मेरा सुख इसमें है कि मेरा बेटा इसी देश में रहकर पचास हजार कमाए पर शाम का खाना मेरे साथ खाए। कहा कि बच्चों पर पढ़ाई का बोझ न डालें। उन्हें तनाव न दें।
इससे पूर्व अजीम शायर नवाज देवबंदी ने गज़ल और शेरों का नज़राना पेश किया, तो महफिल ने हर मिसरे पर अदब से दाद दी। उन्होंने कहा कि, ‘एक आंखों के पास है, एक आंखों से दूर, बेटा हीरा होता है, बेटी कोहिनूर। ‘मां के लिए शेर पढ़ा, ‘उसकी एड़ी पर्वत चोटी लगती है, मां के पांव से जन्नत छोटी लगती है’। सुनकर पूरे पंडाल में श्रोता भाव-विभोर हो गए। इसके बाद उन्होंने सुनाया ‘जीने के सिर्फ एक बहाने में मर गए, हम जिंदगी का बोझ उठाने में मर गए। अच्छा था घर की आग बुझाने में मरते हम, अफसोस अपनी जान बचाने में मर गए।‘ देश के हालात पर उन्होंने शेर पढ़ा, जलते घर को देखने वालों फूस का छप्पर आपका है, आग के पीछे तेज हवा है, आगे मुकद्दर आपका है। उसके कत्ल पर मैं चुप था, मेरा नंबर अब आया, मेरे कत्ल पर आप भी चुप हैं, अगला नंबर आपका है। ’
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अलवर से आए ओज के कवि विनीत चौहान ने देशभक्ति की रचनाएं पेश की तो पूूरा पंडाल भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। उन्होंने कहा ‘किसका खून नहीं खोलेगा पढ़ पढ़कर अखबारों में, शेरों की गर्दन कटवा दी कुत्तों के दरबारों में। इतना खून नहीं छिड़को कि मौसम बागी हो जाए। सेना को इतना मत रोको सैनिक बागी हो जाए’... सुनकर पूरे माहौल में जोश भर गया। उन्होंने सुनाया कि आतंकी कैसे घुस आए लाहौरी दरबारों से, लगता है कुछ चूक हुई है अपने चौकीदारों से। जिस दिन गोली का उत्तर हम गोली से दे पाएंगे, उस दिन आतंकी क्या उनके बाप भी ठीक हो जाएंगे, सुनकर तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई देने लगी।
हास्य व्यंग्य के मशहूर कवि डॉ. प्रवीण शुक्ला ने काव्यपाठ किया तो पूरा पंडाल ठहाकों से गूंज उठा। डॉ. प्रवीण शुक्ला ने हास्य की फुहार छोड़ी। उन्होंने लय में काव्यपाठ किया, जाने कितनों की चरखी घुमा दी, मोदी जी ने ढेर कर दिया, नोटबंदी जीएसटी लगाकर पूरा घालमेल कर दिया, पर दर्शकों ने खूब तालियां बटोरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंदाज में उन्होंने नोटबंदी के भाषण से गुदगुदाया। उन्होंने देश भक्ति से ओतप्रोत कविता पढ़ी कहा ‘मां ने कहा पांच बेटे हैं मेरे, धरती मां के लिए सब कुर्बान हैं, बाबा ने कहा मेरी सूखी हड्डियों में अभी भी जान है, सैनिक की पत्नी ने कहा हुंकार कर, शेर की हूं शेरनी शिकार पर जाऊंगी, भारत की चोटियों पर बैठे घुसपैठियों को तार तारकर लाऊंगी, पति को देश पर पहले ही वार दिया, अब अपनी भी सांस वार कर जाऊंगी
विख्यात शायरा शबीना अदीब ने बेहतरीन रचना पढ़ी, खामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फत नई नई है। अभी तकल्लुफ है गुफ्तगू में, अभी मोहब्बत नई नई है। इसके बाद उन्होंने पढ़ा जो खानदानी रईस हैं, वो मिजाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है। जरा सा कुदरत ने क्या नवाजा के आके बैठे हो पहली सफ में, अभी से उड़ने लगे हवा में, अभी तो शोहरत नई नई है। पढ़ी तो श्रोतओं ने बार बार दाद दी।
उन्होंने नज्म भी पढ़ी, ‘तू रास्ते का मुसाफिर रहे, तेरी एक एक ठोकर उठा लाऊंगी अपनी बेचैन पलकों से चुन छू के मैं, तेरे रास्ते से पत्थर उठा लाऊंगी।
हास्य व्यंग्य के जाने माने कवि शंभू शिखर ने अपनी जबरदस्त कविताओं से छाप छोड़ी। ‘चेहरे पर एक रुआब नया चढ़ भी जाता है, इतिहास एक नया मुकाम गढ़ भी जाता है। शादी के बाद अगर बीवी साथ न दे, सीने का नाप इंच-इंच बढ़ भी जाता है’ सुनाकर सबको खिलखिलाने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद उन्होंने सुनाया कि ‘उल्टे तवे पर रोटियां सिकती नहीं ज्यादा, घटिया हो क्वालिटी तो बिकती नहीं ज्यादा। दाम के बिना दोस्ती चलती नहीं ज्यादा’ सुनाकर वाहवाही लूटी। कवि सम्मेलन और मुशायरे का संचालन डॉ. प्रवीण शुक्ल ने किया।

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हीरो मोटोकोर्प, केएल इंटरनेशनल स्कूल, कैच मसाले, महिंद्रा, द अध्ययन स्कूल, दयाल फर्टिलाइजर, केएमसी हॉस्पिटल, होटल कंट्री इन, जय दुर्गा ड्रेस एम्पोरियम, न्यू लक्ष्मी साउंड ट्रैक, इवेंट पैराडाइज।
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खास बातें:
- अमर उजाला के अभिनव अभियान ‘मां तुझे प्रणाम’ में कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन
- भैसाली मैदान में विख्यात कवियों और शायरों ने बांधा समां
- देशभक्ति की बही धारा, हास्य, वीर रस में देर रात तक झूमे श्रोता


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