पल भर में छिन गईं दो परिवारों की खुशियां
मेरठ। शनिवार शाम अचानक हरिद्वार घूमने का प्रोग्राम बना। रात को अतुल कार लेकर अरुण के घर पहुंचा तो परिवार को इसका पता चला। पांचों दोस्त अपने परिजनों से रविवार को जल्दी लौटने का वादा कर हंसी खुशी निकले। लेकिन सुबह हादसे की खबर आते ही दो परिवारों पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा।
फूलबाग कॉलोनी गली नंबर दो निवासी दिव्यांग रामकुमार गुप्ता ने बताया कि उनके बेटों अरुण और अभय की गली नंबर एक निवासी अतुल से गहरी दोस्ती थी। शनिवार रात अतुल कार लेकर घर आया तो उन्हें पता चला कि उन्होंने हरिद्वार घूमने का प्रोग्राम बनाया है। लेकिन पता नहीं था कि वादा करके जा रहा अरुण अब कभी नहीं लौटेगा। रविवार सुबह हादसे की सूचना पर मुजफ्फरनगर पहुंचे, जहां शाम को पोस्टमार्टम के बाद बेटे का शव लेकर लौटे। अरुण एक कोल डिपो में सर्विस करता था। उसके वेतन से परिवार का खर्चा चल रहा था। इस हादसे से अरुण के माता-पिता और विवाहित बहन साक्षी का रो रोकर बुरा हाल है।
पूरा नहीं हुआ अतुल का सपना
हादसे का शिकार हुआ अतुल सक्सेना सीए की तैयारी कर रहा था। कामयाब सीए बनने का सपना लिए वह पीएल शर्मा रोड स्थित एक सेंटर पर प्रेक्टिस कर रहा था। अतुल के पिता की मृत्यु हो चुकी है। मां ही घर को संभाल रही हैं। अतुल का बड़ा भाई अनुज और बहन सोनी हैं। अतुल के जाने के बाद परिवार बुरी तरह टूट गया है।
पापा बस रात की तो बात है
दिव्यांग रामकुमार दैनिक क्रियाओं के लिए भी अपने बेटों पर मोहताज हैं। बकौल रामकुमार इसी वजह से उन्होंने अरुण से कहा था कि दोनों भाई मत जाओ, उन्हें दिक्कत हो सकती है। उन्होंने एक को घर पर रहने को कहा था। लेकिन बेटे बोेले कि पिताजी बस एक रात क ी ही तो बात है। कल जल्दी लौट जाएंगे। बेटे की खुशी की खातिर उन्होंने दोनों को भेज दिया। उन्हें क्या पता था कि ये रात उनके एक बेटे को उनसे छीन लेगी। दूसरा बेटा अभय भी मौत से जूझ रहा है। वहीं, उन्हें मलाल है कि इस हादसे के बाद कोई भी जनप्रतिनिधि या नेता मदद के लिए नहीं पहुंचा।
अभय की हालत बेहद नाजुक
अभय का इलाज कर रहे अस्पताल के स्टाफ ने बताया कि अभय के सिर में गहरी चोट है। उसके दिमाग में खून जमा हो चुका है। हालत नाजुक है। परिजनों को भी ये बात बता चुके हैं। लेकिन चिकित्सकों की टीम प्रयास में लगी है।
जहन में घूम रहा हादसा
इस हादसे से फूलबाग कालोनी गली नंबर 6 निवासी चिराग बेहद सहमा और डरा हुआ है। उसकी आंखों के आगे बार-बार यही मंजर दौड़ रहा है। उसके परिजनों ने बताया कि उसकी तबियत ठीक नहीं है। इसी वजह से परिजन उसे किसी से नहंी मिलने दे रहे हैं। इसी तरह गली नंबर 12 निवासी सचिन सिंह भी किसी अस्पताल में भर्ती है।
खास बातें:
सुबह जल्द लौटने का वादा कर गए थे, पुलिस का फोन आते ही टूटा गमों का पहाड़