सरकारी अस्पतालों के लिए नहीं मिले निजी चिकित्सक
मेरठ। निजी चिकित्सक सरकारी अस्पतालों में सेवा देने को इच्छुक नहीं हैं। यही वजह है कि सरकार की इस योजना को यहां पंख नहीं लग सके हैं, जिसमें उन्होंने सरकारी अस्पताल में स्वेच्छा से सेवा देने के इच्छुक चिकित्सकों की सूची मांगी थी, मगर एक साल होने को है, यह सूची अभी तक तैयार नहीं हो सकी है।
पिछले साल मई माह में ही शासन ने सभी जिलों के सीएमओ से ऐसे प्राइवेट डॉक्टरों की सूची मांगी थी, जो सरकारी अस्पतालों में स्वेच्छा से मरीज देखने के इच्छुक हैं। ऐसा सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और जनसामान्य को गुणवत्तायुक्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराए जाने के उद्देश्य से किए जाने की कवायद थी। मेरठ में यह योजना अभी तक परवान नहीं चढ़ सकी है। जिला अस्पताल से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों की कमी है। खासकर विशेषज्ञ चिकित्सक तो बेहद कम हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि निजी चिकित्सक अगर अपनी इच्छा से सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर कुछ घंटे मरीजों को देख लें तो बेहतर होगा। इससे चिकित्सकों की कमी की भरपाई करने में भी मदद मिलेगी, लेकिन ऐसा अभी तक हो नहीं सका है। सीएमओ का कहना है कि शासन के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस संबंध में आईएमए के चिकित्सकों के साथ बैठक करेंगे, जिसमें इच्छुक चिकित्सकों की सूची मांगी जाएगी।
100 से अधिक चिकित्सकों की है कमी
मेरठ में सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य केंद्रों में 100 से ज्यादा चिकित्सकों की कमी है। मेडिकल कालेज में मानक से 70 चिकित्सक कम हैं, जबकि जिला अस्पताल में 25। इसी तरह सीएचसी और पीएचसी पर भी 20 चिकित्सकों की कमी चल रही है।
खास बातें:
डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए शासन ने उठाया था कदम
स्वेच्छा से सरकारी अस्पताल में सेवा देने के की मांगी थी सूची