मेरठ। डॉक्टर बनने की ख्वाहिश छात्रों से ज्यादा छात्राओं में है। नीट (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) के तहत दस्तावेजों के सत्यापन में यह देखने को मिला है। अभ्यर्थियों में करीब 60 प्रतिशत छात्राएं और 40 प्रतिशत छात्र हैं।
नीट के अभ्यर्थियों के दस्तावेजों के सत्यापन के चौथे दिन बुधवार को 1089 के सत्यापन हुए। 62 ऐसे रहे, जिनके फॉर्म में गलतियां थीं या उनके मूल प्रमाण पत्र नहीं बने थे। बृहस्पतिवार को जो बचे हुए अभ्यर्थी हैं, उनके दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। जिन अभ्यर्थियों के सत्यापन छूट गए हैं, उनके लिए यह आखिरी मौका हो सकता है। हालांकि चर्चा है कि जो रह जाएंगे, उनके लिए आगे भी तारीख दी जा सकती है, लेकिन अभी तक यह तय नहीं हो पाया है। चार दिनों में 3926 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन हो चुका है। इनमें करीब 2400 छात्राएं थीं। दूसरी तरफ, नीट के तहत दस्तावेजों के सत्यापन में चौथे दिन भी अभ्यर्थियों को दिक्कत हुई। मेडिकल कॉलेज के प्रमुख अधीक्षक डॉ. विभु साहनी ने बताया कि इस बार छात्राएं ज्यादा तादाद में पास हुई हैं, इसलिए छात्रों के मुकाबले छात्राएं ज्यादा आ रही हैं। इस बार नीट की परीक्षा में कुल 11 लाख 38 हजार 890 अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जिनमें से 6 लाख 11 हजार 539 ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास की थी। इनमें से दो लाख 66 हजार 211 अभ्यर्थी छात्र, जबकि 3 लाक 45 हजार 313 छात्राएं थीं। आठ समलैंगिक भी परीक्षा में शामिल हुए थे, जिसमें से पांच उत्तीर्ण हुए हैं।