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स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल, इसीलिए यूपी फिसड्डी

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स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल, इसीलिए यूपी फिसड्डी
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नीति आयोग की रिपोर्ट में 21 राज्यों में सबसे निचले पायदान पर है यूपी
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। स्वास्थ्य व चिकित्सीय सेवाएं मुहैया कराने में 21 बड़े राज्यों में यूपी सबसे फिसड्डी निकला है। नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट यही कहती है। इसकी वजह चिकित्सकों की कमी और चिकित्सीय सुविधाओं का अभाव है। मेरठ में भी सरकारी चिकित्सीय सेवाएं बदहाल हैं। जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, सीएचसी, पीएचसी हों या अर्बन हेल्थ सेंटर, सभी में चिकित्सकों की कमी है। दवाइयों का टोटा है। जांच करने वाले संसाधनों का अभाव है।
मेरठ में सरकारी चिकित्सालयों में हर साल 15 लाख से ज्यादा मरीज आते हैं। सीएचसी-पीएचसी पर सर्जन और रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं। गायनिक भी गिनती की हैं। कमोबेश ऐसा ही हाल महिला जिला चिकित्सालय का है। जिला अस्पताल और मेडिकल में गंभीर मरीजों को उपचार नहीं मिलता है। मेडिसिन, रेडियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, ह्यूमन मेटाबोलिज्म, फोरेंसिक मेडिसिन समेत तमाम चिकित्सकों की कमी है। अल्ट्रासाउंड तक के लिए एडवांस बुकिंग करनी पड़ती है। यही हाल अन्य जिलों में भी है। इसी कारण 21 राज्यों में यूपी सबसे आखिरी पायदान पर है, जबकि केरल नंबर वन है।
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मेडिकल कॉलेज में ये सुविधाएं नहीं
लेजर तकनीक से आंखों का इलाज नहीं हो सकता
बर्न वार्ड नहीं बन सका, गंभीर जले मरीजों को रेफर कर दिया जाता है
कैंसर के मरीजों के लिए रेडियोथैरेपी मशीन नहीं है
जिला अस्पताल ये सुविधाएं नहीं
न्यूरो सर्जरी, कैंसर से संबंधित आंकोलॉजी, त्वचा से संबंधित प्लास्टिक सर्जरी, गुर्दे से संबंधित नेफ्रोलॉजी, रेडियोथैरेपी, पीडियाट्रिक्स सर्जरी, हार्मोन से संबंधित एंडोक्राइनोलॉजी और एमआरआई आदि।
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दिल्ली के अस्पतालों का सहारा
मरीजों को गंभीर बीमारी होने पर दिल्ली के अस्पतालों का ही सहारा है। साल 2017 में मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के निरीक्षण के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि जब यह सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल है, तो मरीज रेफर क्यों किए जाते हैं। यह सुनकर सारे अधिकारी बगलें झांकने लगे थे।
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