फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैंट में लगा काउ टावर, जुलाई में होगा शुरू

विज्ञापन
विज्ञापन
कैंट में लगा काउ टावर, जुलाई में होगा शुरू
विज्ञापन

- लालकुर्ती स्थित बुचरी रोड पर लगाया गया पहला टावर
- वर्ष-2017 में शुरू हुई थी टावर लगाने की प्रक्रिया
मेरठ।
कैंट क्षेत्र में टावर लगने की शुरुआत हो र्गई है। मंगलवार से लालकुर्ती स्थित बुचरी रोड पर टावर लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसे बुधवार शाम तक पूरा कर लिया गया। काउ टावर पर जेनरेटर भी लगाया गया है। कैैंट क्षेत्र में दस साइटों पर काउ और छह साइटों पर लीज पर टावर लगाने की प्रक्रिया पूरी की जानी है। दो माह पहले मध्य कमान लखनऊ से अनुमति मिलने के बाद काम में तेजी आई थी। इन टावर के लगने से मोबाइल उपभोक्ताओं को सिग्नल की दिक्कत खत्म हो जाएगी। इंडस कंपनी की ओर से लगाए जाने वाले टावरों को एक सप्ताह के अंदर सभी साइटों पर लगा दिया जाएगा। जुलाई में कैंट के लोगों को इसका लाभ मिलने लगेगा।
मोबाइल टावर की जमीन पर उठे सवाल
कैंट बोर्ड बैठक में 150 वर्ग मीटर जमीन पर एक टावर को लगाया जाना तय किया गया था। लेकिन बोर्ड बैठक में हुए फैसलों को दरकिनार किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, काउ टावर को 50 वर्गमीटर और लीज पर लगने वाले टावर को 12 वर्गमीटर जमीन पर लगाया जा रहा है। इसको लेकर बोर्ड सदस्य भी आक्रामक रुख अपना सकते हैं। अगर काउ की दस साइटों से 50 वर्गमीटर जमीन का ही पैसा मिला तो कैंट बोर्ड को सालाना एक करोड़ 36 लाख 41 हजार 267 रुपये का नुकसान होगा। वहीं, लीज की 6 साइटों से 12 वर्गमीटर भूमि का पैसा मिला तो यहां से भी सालाना एक करोड़ 30 लाख 16 हजार 567 रुपये का नुकसान होगा। मोबाइल टावर के लिए 30 साल का अनुबंध है। इससे साफ है कि कैंट बोर्ड को करीब 90 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में एक बार फिर से कैंट बोर्ड को धन की दिक्कत से जूझना पड़ेगा।
विज्ञापन

लीगल एडवाइज के बाद तय होंगे रेट
रक्षा संपदा अधिकारी भावना सिंह ने बताया कि बुधवार को इंडस टावर की तरफ से स्टांप पेपर मिल गए हैं। अनुबंध प्रक्रिया को लीगल एडवाजर से स्टडी कराकर ही पूरा किया जाएगा। कंपनी को एक साल का किराया 80 लाख रुपये देना है। इससे पहले कंपनी सिक्योरिटी के रूप में 90 लाख रुपये दे चुकी है। एक सप्ताह के अंदर टावर का लोकार्पण कार्यक्रम होगा। उन्होेंने कहा कि 150 वर्गमीटर तक जमीन पर टावर लगाए जाने हैं। यह बाद में तय होगा कि वह 50 पर लगें या 100 वर्ग मीटर पर।
विज्ञापन

वर्जन====
ऐसा कोई मामला नहीं है। जितनी जमीन तय हुई थी उतनी पर ही टावर लगाए जा रहे हैं। जनता को अब राहत मिलेगी। सब बेकार की बात चल रही हैं।
बीना वाधवा, कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष
150 वर्ग मीटर जमीन तय की गई थी। अगर तय जमीन पर टावर नहीं लगाया गया तो संबंधित विभाग के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जो लोग इसके पीछे हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
मंजू गोयल, बोर्ड सदस्य
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें